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हरियाणा: सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय एकता का दिखा अद्भुत संगम

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हरियाणा  Published by: Anil , Date: 12/05/2026 12:15:22 pm Share:
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  • 12/05/2026 12:15:22 pm
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संक्षेप

हरियाणा: हांसी 11 मई पवन धाम बजरंग आश्रम में सोमवार को जिला स्तरीय सोमनाथ स्वाभिमान पर्व श्रद्धा, भक्ति और राष्ट्र गौरव के वातावरण में भव्य रूप से आयोजित किया गया।

विस्तार

हरियाणा: हांसी 11 मई पवन धाम बजरंग आश्रम में सोमवार को जिला स्तरीय सोमनाथ स्वाभिमान पर्व श्रद्धा, भक्ति और राष्ट्र गौरव के वातावरण में भव्य रूप से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायक विनोद भयाना ने की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, महिलाएं, युवा और श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान शिव के जयघोष और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार वर्ष की 75वीं वर्षगांठ पर सभी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और के.एम. मुंशी ने गुलामी के प्रतीकों को समाप्त कर भारत की सनातन चेतना को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक अस्मिता, आत्मगौरव और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भी सोमनाथ के पुनरुत्थान का सपना देखा था। बाहरी आक्रमणकारियों ने केवल मंदिरों को नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को कमजोर करने का प्रयास किया, लेकिन भारतीय संस्कृति की शक्ति के सामने वे सफल नहीं हो सके। सांसद ने कहा कि 11 मई 1951 को सोमनाथ मंदिर के कपाट जनता के लिए खोले जाना भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण का ऐतिहासिक क्षण था। सुभाष बराला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं सोमनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष हैं और उन्होंने सोमनाथ की प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने द्वादश ज्योतिर्लिंगों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये भारत की सांस्कृतिक, भौगोलिक और भावनात्मक एकता के प्रतीक हैं। उत्तर में केदारनाथ से दक्षिण में रामेश्वरम और पूर्व में वैद्यनाथ से पश्चिम में सोमनाथ तक फैले ये ज्योतिर्लिंग भारत को एक सूत्र में पिरोते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विधायक विनोद भयाना ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को स्मरण करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर का इतिहास यह संदेश देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी यदि आस्था और संकल्प मजबूत हो तो पुनर्निर्माण संभव है। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक सैनी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की सनातन संस्कृति और आत्मगौरव का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को पुनः विश्व पटल पर स्थापित कर रहा है।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ से तथा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुरुक्षेत्र से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नागरिकों को संबोधित किया। लोगों ने उनके संदेश को उत्साहपूर्वक सुना। इस अवसर पर डॉ. लोकेश शर्मा एवं विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों द्वारा भगवान शिव की महिमा पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। पीडब्ल्यूडी विश्राम गृह से पवन धाम बजरंग आश्रम तक भव्य कलश यात्रा भी निकाली गई, जिसमें सैकड़ों महिलाओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय तथा सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग द्वारा सोमनाथ मंदिर की एक हजार वर्ष की गौरवगाथा पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका अवलोकन मुख्य अतिथियों ने किया। इस अवसर पर एडीसी लक्षित सरीन, एसडीएम राजेश खोथ, जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार, सुनीता डांगी, जयवीर माजरा, सुखविंदर जाखड़, धर्मवीर रतेरिया, अशोक ढालिया, विनोद सैनी, तनुज खुराना, रवि अरोड़ा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।