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मध्य प्रदेश: सार्वजनिक बैंक पेंशन योजना में अपडेशन पर चर्चा, वित्तीय स्थिति हुई स्थिर

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मध्य प्रदेश  Published by: Kamal Patni , Date: 20/02/2026 11:42:11 am Share:
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की पेंशन योजना को लेकर देशभर में चर्चा तेज है।

विस्तार

मध्य प्रदेश: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की पेंशन योजना को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। पेंशन अपडेशन (8088 प्वाइंट मर्जर) के मुद्दे पर यह तर्क दिया जा रहा है कि यदि पेंशन बढ़ाई गई तो पेंशन फंड पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा। परंतु जब हम उपलब्ध आंकड़ों और संरचनात्मक तथ्यों का विश्लेषण करते हैं, तो तस्वीर कुछ अलग दिखाई देती है। वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र बैंकों का पेंशन कोष लगभग ₹4,28,000 करोड़ का है। इस पर औसतन 7% ब्याज दर से लगभग ₹30,000 करोड़ वार्षिक आय होती है। दूसरी ओर, वर्तमान वार्षिक पेंशन भुगतान लगभग ₹27,600 करोड़ है। अर्थात् अभी भी फंड में वार्षिक अधिशेष मौजूद है। यदि अपडेशन लागू होता है तो अनुमानित वार्षिक भुगतान लगभग ₹34,200 करोड़ तक जा सकता है। पहली दृष्टि में यह ब्याज आय से अधिक प्रतीत होता है, परंतु यहाँ दो महत्वपूर्ण तथ्य अक्सर अनदेखे रह जाते हैं। 

 

बैंक हर वर्ष एक्चुरियल अंशदान (Actuarial Contribution) भी जमा करते हैं। यह योजना 2010 के बाद “क्लोज्ड स्कीम” है — कोई नया सदस्य नहीं जुड़ सकता। घटती देनदारी का मॉडल। यह पेंशन योजना बढ़ती हुई देनदारी नहीं है। लाभार्थियों की संख्या हर वर्ष 3–4% कम हो रही है। जैसे-जैसे पेंशनर आयु के अंतिम चरण में पहुँचते हैं, अनेक मामलों में 30% फैमिली पेंशन लागू होती है, जिससे कुल मासिक भार स्वतः कम हो जाता है। सरल शब्दों में कहें तो यह “Declining Liability Model” है — समय के साथ इसका दायित्व स्वाभाविक रूप से घटता जाएगा। 25–30 वर्षों के बाद यह योजना लगभग समाप्ति की ओर होगी। फंड में आय और योगदान बंद हो चुका होता
परंतु यहाँ स्थिति उलट है। फंड बड़ा है, ब्याज आय निरंतर है, बैंक अंशदान करते हैं, और लाभार्थी संख्या घट रही है। वास्तविक प्रश्न वित्तीय नहीं, बल्कि न्याय का है। 2008 में सेवानिवृत्त कर्मचारी और 2024 में सेवानिवृत्त कर्मचारी के बीच पेंशन में भारी अंतर है, जबकि सेवा और दायित्व समान रहे हैं। माननीय Supreme Court of India ने भी वर्ष-वार तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, जो इस असमानता को स्पष्ट करेगा। क्या पेंशन फंड को बजट में समाहित किया जा सकता है। आज अधिकांश सरकारी पेंशन सीधे केंद्र या राज्य बजट से दी जाती है। कुछ ही विभाग ट्रस्ट आधारित फंड मॉडल पर चल रहे हैं। यदि भविष्य में आवश्यक समझा जाए, तो केंद्र सरकार अंतिम गारंटी मॉडल या आंशिक बजटीय समावेशन पर विचार कर सकती है। परंतु वर्तमान आंकड़े यह संकेत नहीं देते कि तत्काल किसी आपात हस्तक्षेप की आवश्यकता है।