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राजस्थान: बरसात में भी बनास नदी में अवैध बजरी खनन जारी, प्रशासन पर उठे सवाल

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राजस्थान  Published by: Prakash Gadari , Date: 09/07/2026 11:47:09 am Share:
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  • Date:
  • 09/07/2026 11:47:09 am
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राजस्थान: राजस्थान के कपासन और राशमी क्षेत्र में बनास नदी में कथित अवैध बजरी खनन को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। वर्षा ऋतु के दौरान खनन पर प्रतिबंध होने के बावजूद नदी क्षेत्र में बजरी खनन जारी रहने के आरोपों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नियमों की अनदेखी कर खनन गतिविधियां संचालित हो रही हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग इस पर प्रभावी कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बरसात के मौसम में नदी से बजरी निकालने पर रोक के स्पष्ट नियम होने के बावजूद खनन माफिया बेखौफ होकर सक्रिय हैं। उनका कहना है कि इस अवैध गतिविधि से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि नदी के प्राकृतिक स्वरूप और आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय और भौगोलिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कई सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि आखिर प्रतिबंध के बावजूद बनास नदी में बजरी खनन किसके संरक्षण में चल रहा है। यदि खनन अवैध है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। लोगों ने यह भी पूछा कि अवैध खनन पर पूरी तरह रोक कब लगेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कब होगी। क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रशासन की चुप्पी और जनप्रतिनिधियों की खामोशी से लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। उनका आरोप है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है। इससे यह धारणा बन रही है कि खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने में प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नहीं है।

जनता ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि कहीं भी अवैध बजरी खनन हो रहा है तो तत्काल प्रभाव से उसे बंद कराया जाए। साथ ही अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि संबंधित विभाग मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करेगा और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो उसे तत्काल रोका जाएगा।


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