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झारखंड: NTPC केरेडारी कोल माइंस पर ग्रामीणों का आक्रोश, अस्पताल और रोजगार की मांग हुई तेज
- Photo by : social media
विस्तार
झारखंड: हजारीबाग जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र स्थित पांडु गांव में संचालित एनटीपीसी केरेडारी कोल माइंस को लेकर ग्रामीणों का असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि परियोजना शुरू हुए तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कंपनी ने प्रभावित ग्रामीणों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराईं। स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार, पुनर्वास और मुआवजे जैसे अहम मुद्दों पर कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि कोल माइंस के संचालन से क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ा है, लेकिन इसके बावजूद अब तक माइंस क्षेत्र के आसपास एक अस्पताल तक का निर्माण नहीं किया गया। किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को दूर-दराज के अस्पतालों में ले जाना पड़ता है, जिससे समय पर उपचार नहीं मिल पाता। उनका आरोप है कि कंपनी ने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करने में गंभीर लापरवाही बरती है। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि एनटीपीसी ने ग्रामीणों से पर्याप्त संवाद किए बिना ही क्रेशर संचालन शुरू कर दिया। इससे क्षेत्र में धूल और प्रदूषण बढ़ने की आशंका है, जबकि स्थानीय लोगों की राय और सहमति को महत्व नहीं दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से प्रभावित लोगों को विश्वास में लेने के बजाय उनकी अनदेखी की जा रही है। रोजगार के मुद्दे पर भी ग्रामीणों ने कंपनी के खिलाफ नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि स्थानीय युवाओं को नौकरी देने के बजाय बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। परियोजना से प्रभावित परिवारों को रोजगार देने के वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं, जबकि विस्थापित परिवार पुनर्वास और मुआवजे के लिए लगातार कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पांडु पंचायत में पिछड़े वर्ग के लोगों की संख्या अधिक है, लेकिन उनके उत्थान के लिए कंपनी की ओर से कोई प्रभावी सामाजिक या कल्याणकारी योजना शुरू नहीं की गई। इससे लोगों में यह भावना मजबूत हुई है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। ग्रामीणों ने मांग की है कि माइंस क्षेत्र के पास जल्द से जल्द एक आधुनिक अस्पताल बनाया जाए, स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए, लंबित मुआवजा और पुनर्वास के मामलों का पारदर्शी समाधान किया जाए तथा कंपनी प्रशासन ग्रामीणों के साथ उच्चस्तरीय वार्ता करे। ग्रामीण प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। फिलहाल इस मामले को लेकर क्षेत्र में असंतोष का माहौल बना हुआ है और लोगों की निगाहें कंपनी तथा जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।