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उत्तर प्रदेश: प्रतिबंधित मांझे से युवक की कटी गर्दन, हालत गंभीर
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: लखनऊ राजधानी में प्रतिबंधित और जहरीले मांझे ने एक बार फिर खतरनाक रूप दिखाया है। श
विस्तार
उत्तर प्रदेश: लखनऊ राजधानी में प्रतिबंधित और जहरीले मांझे ने एक बार फिर खतरनाक रूप दिखाया है। शहर के व्यस्त इलाके रामाधीन सिंह मार्केट के बाहर सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब पतंग के तेज धारदार मांझे की चपेट में आकर एक युवक की गर्दन बुरी तरह कट गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक युवक बाइक/पैदल सड़क से गुजर रहा था, तभी हवा में उलझा मांझा अचानक उसकी गर्दन में फंस गया। मांझा इतना तेज था कि युवक संभल भी नहीं सका और कुछ ही सेकंड में उसकी गर्दन से खून बहने लगा। वह लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़ा। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद दुकानदारों और राहगीरों ने तुरंत दौड़कर युवक को संभाला और निजी वाहन/एंबुलेंस की मदद से नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के अनुसार युवक की हालत गंभीर लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है। पहले भी हो चुके हैं कई हादसे लखनऊ में प्रतिबंधित ‘चाइनीज मांझा’ पहले भी कई जानलेवा घटनाओं का कारण बन चुका है। दोपहिया वाहन चालकों, बच्चों और यहां तक कि पुलिसकर्मियों तक के घायल होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इसके बावजूद बाजारों में इसकी खुलेआम बिक्री पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की सख्ती के दावों के बावजूद कुछ दुकानदार चोरी-छिपे जहरीला मांझा बेच रहे हैं। त्योहारों या पतंगबाजी के मौसम में इसकी मांग बढ़ने के साथ ही जोखिम भी बढ़ जाता है। कानूनन है प्रतिबंधित तेज धार और धातु/केमिकल मिश्रित मांझे पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाया जा चुका है, क्योंकि यह न केवल इंसानों बल्कि पक्षियों के लिए भी जानलेवा साबित होता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का सिंथेटिक मांझा आसानी से नहीं टूटता और लंबे समय तक पेड़ों व बिजली के तारों में फंसा रहता है, जिससे लगातार खतरा बना रहता है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि प्रतिबंधित मांझा कहां से आया और किन दुकानों के माध्यम से इसकी सप्लाई हो रही थी। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है। घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने प्रशासन से सख्त अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक अवैध बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं लगेगी, तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे। राजधानी में बढ़ते इन मामलों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रतिबंध के बावजूद ‘मौत का मांझा’ आखिर बाजार तक कैसे पहुंच रहा है।
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