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उत्तर प्रदेश: शिक्षक सुसाइड केस, बीएसए निलंबन की सिफारिश
 

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उत्तर प्रदेश  Published by: Omprakash Tiwari , Date: 24/02/2026 10:21:28 am Share:
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  • 24/02/2026 10:21:28 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: गोरखपुर शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में अब प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: गोरखपुर शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में अब प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। जिला प्रशासन की उच्चस्तरीय जांच में प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव पर निलंबन की तलवार लटक गई है। जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने उनके निलंबन एवं विभागीय कार्यवाही की संस्तुति शासन को भेज दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति में एसडीएम सदर श्रुति शर्मा और जिला विद्यालय निरीक्षक को सदस्य बनाया गया। समिति ने सभी अभिलेखों, पत्राचार, न्यायालय आदेश और संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की, जिसे जिलाधिकारी को सौंप दिया गया। हाईकोर्ट आदेश की अनदेखी बनी बड़ी वजह जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि माननीय हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद करीब एक वर्ष तक बीएसए स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। आदेश के अनुपालन में देरी और कथित उदासीनता के कारण शिक्षक पर मानसिक दबाव बढ़ता गया।

 

रिपोर्ट में यह भी संकेत मिला कि यदि समय पर न्यायालय के आदेश का पालन होता, तो हालात इस हद तक नहीं पहुंचते। प्रशासनिक शिथिलता और संवादहीनता को घटना की पृष्ठभूमि में अहम कारक माना गया है। मृतक शिक्षक के परिजनों की तहरीर पर गुलरिहा थाना में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस द्वारा विधिक कार्रवाई जारी है और संबंधित धाराओं में जांच आगे बढ़ाई जा रही है। जांच के दौरान सामने आई लापरवाही के आधार पर पटल सहायक संजीव सिंह को पहले ही जिलाधिकारी के आदेश पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जा चुका है। अब पूरी जिम्मेदारी बीएसए स्तर की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर केंद्रित हो गई है। अब शासन के फैसले पर टिकी निगाहें जिलाधिकारी द्वारा निलंबन की संस्तुति शासन को भेजे जाने के बाद अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि शासन स्तर से निलंबन की स्वीकृति मिलती है, तो यह शिक्षा विभाग में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ी कार्रवाई मानी जाएगी। यह मामला न केवल प्रशासनिक जवाबदेही बल्कि न्यायालय के आदेशों के अनुपालन की गंभीरता को भी रेखांकित करता है। आने वाले दिनों में शासन का फैसला इस प्रकरण की दिशा तय करेगा।


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