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असम: तिवा भाषा और संस्कृति के संरक्षण को लेकर जागरूकता सभा, युवाओं को अपनी विरासत से जुड़ने का संदेश

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असम  Published by: Rajib Doloi , Date: 17/08/2026 02:42:13 pm Share:
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संक्षेप

असम: 15 अगस्त को बामफर क्षेत्र में तिवा भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को लेकर एक जागरूकता सभा आयोजित की गई।

विस्तार

असम: 15 अगस्त को बामफर क्षेत्र में तिवा भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को लेकर एक जागरूकता सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम बामफर निवासी उद्धव कुवार के घर के आंगन में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डिमोरिया के समाजसेवी अजित देउरी तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित लघु फिल्म निर्माता-निर्देशक एवं अभिनेता डॉ. राजीव दलोई ने की। इस दौरान तिवा समाज के कई प्रमुख पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। वक्ताओं ने तिवा भाषा और सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

तिवा भाषा बोलने का कराया अभ्यास

सभा में मौजूद लोगों को दैनिक बातचीत में इस्तेमाल होने वाले कुछ शब्द और वाक्य तिवा भाषा में बोलने का अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों ने अपना परिचय तिवा भाषा में देना सीखा। इस गतिविधि का उद्देश्य लोगों, विशेषकर युवाओं में अपनी मातृभाषा के प्रति रुचि और जुड़ाव बढ़ाना रहा।

तिवा राष्ट्रीय गीत का किया अभ्यास

भाषा अभ्यास के बाद उपस्थित लोगों ने तिवा राष्ट्रीय गीत “अ आंगे तिवा तचिमा” का सामूहिक अभ्यास किया। आयोजकों ने बताया कि भाषा के साथ-साथ पारंपरिक गीतों को भी जीवित रखना तिवा समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए जरूरी है।

लोकनृत्य के साथ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम के अंतिम चरण में तिवा समाज के पारंपरिक लोकनृत्य मोइनारी कांठी/बरत का अभ्यास कराया गया। महिला, पुरुष और युवाओं ने उत्साह के साथ इसमें भाग लिया। आयोजकों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से तिवा भाषा, लोकगीत और पारंपरिक नृत्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास जारी रहेगा।