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झारखण्ड: नेपाल में डॉ. कौशल जायसवाल ने बढ़ाया भारत का गौरव, ‘प्राइड ऑफ एशिया’ अवार्ड से हुए सम्मानित
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विस्तार
झारखण्ड: छतरपुर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में छह दशकों से निरंतर उल्लेखनीय कार्य कर रहे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर भारत और झारखंड का गौरव बढ़ाया है। पांच दिवसीय नेपाल दौरे के दौरान आयोजित अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्हें प्रतिष्ठित ‘प्राइड ऑफ एशिया अचीवर समिट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरूकता के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। डॉ. कौशल किशोर जायसवाल को प्राप्त यह 85वां सम्मान है, जिनमें 11 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार शामिल हैं। उनकी इस उपलब्धि से पूरे पलामू, झारखंड और देश में खुशी एवं गर्व का माहौल है। नेपाल यात्रा के दौरान उनके साथ उनकी धर्मपत्नी डाली मुखिया पूनम जायसवाल तथा पुत्र एवं छतरपुर पूर्वी के जिला परिषद सदस्य अमित कुमार जायसवाल भी मौजूद रहे। नेपाल के पोखरा एवं काठमांडू स्थित हेरिटेज गार्डन, ललितपुर में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ भारत और नेपाल के राष्ट्रगान, कन्या पूजन, पर्यावरण धर्म प्रार्थना तथा पौधारोपण के साथ हुआ। कार्यक्रम का नेतृत्व नेपाल के केंद्रीय सहकारी अध्यक्ष सरोज कुमार शर्मा एवं कुलेश्वर विद्यालय के प्राचार्य मेघराज दुला ने किया। सम्मेलन में भारत और नेपाल सहित विभिन्न देशों एवं क्षेत्रों से आए पर्यावरणविदों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। वन राखी मूवमेंट की स्वर्ण जयंती और पौधारोपण के 60 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर डॉ. कौशल ने छात्राओं के साथ वृक्षों पर रक्षा सूत्र बांधकर पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश दिया। इस दौरान सबसे भावुक क्षण तब आया जब उन्होंने वर्ष 1980 में स्वयं लगाए गए वृक्षों पर रक्षा सूत्र बांधा। उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे प्रकृति के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण बताया। मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए डॉ. कौशल ने पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्रों की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि “कन्या पूजन से धरती की रक्षा और पौधा पूजन से पूरे ब्रह्मांड की रक्षा का संदेश मिलता है। सूर्य और वृक्षों के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है।” उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, बढ़ता तापमान और जल संकट आज पूरी दुनिया के सामने गंभीर चुनौती बन चुके हैं, जिनसे निपटने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण को अपना नैतिक दायित्व बनाना होगा। स्वदेश लौटने पर पटना, औरंगाबाद, चेगौना एवं गृह क्षेत्र में सामाजिक संगठनों, पर्यावरण प्रेमियों और समर्थकों द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम में डॉ. प्रिंस कुमार, डॉ. जयति, सुनीता तमांग, शिवानी शर्मा, सुरेंद्र जायसवाल, मारकंडे प्रसाद एवं शिल्पा जायसवाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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