Contact for Advertisement 9919916171


मध्य प्रदेश: बैंक पेंशनर्स मामले की 25 फरवरी को प्राथमिकता सूची में सुनवाई, न्यायिक पारदर्शिता से जगी नई उम्मीद ⚖️

- Photo by :

मध्य प्रदेश  Published by: Kamal Patni , Date: 21/02/2026 05:06:16 pm Share:
  • मध्य प्रदेश
  • Published by: Kamal Patni ,
  • Date:
  • 21/02/2026 05:06:16 pm
Share:

संक्षेप

मध्य प्रदेश: बैंक पेंशनर्स से संबंधित दीर्घकालीन प्रकरण को 25.02.2026 को वरीयता क्रम में सूचीबद्ध किए जाने तथा न्यायालयीन कार्यवाही में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु मैं अपनी ओर से

विस्तार

मध्य प्रदेश: बैंक पेंशनर्स से संबंधित दीर्घकालीन प्रकरण को 25.02.2026 को वरीयता क्रम में सूचीबद्ध किए जाने तथा न्यायालयीन कार्यवाही में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु मैं अपनी ओर से तथा समस्त प्रभावित पेंशनर्स की ओर से हार्दिक धन्यवाद एवं कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ। वर्षों से “तारीख पर तारीख” की पीड़ा झेल रहे वृद्ध पेंशनर्स के लिए यह कदम आशा की किरण के समान है। न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और सूचीकरण की स्पष्ट प्रणाली से आम नागरिकों का विश्वास सुदृढ़ होता है तथा न्यायपालिका के प्रति सम्मान और आस्था और भी प्रगाढ़ होती है। हम सभी को विश्वास है कि मानवीय दृष्टिकोण, संवेदनशीलता एवं संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप इस प्रकरण का समयबद्ध और न्यायपूर्ण निराकरण सुनिश्चित होगा, जिससे वृद्ध एवं आश्रित पेंशनर्स को वास्तविक राहत मिल सके।


एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी होने के नाते मैं इस विषय की गंभीरता और पीड़ा को निकट से अनुभव कर रहा हूँ। अतः आपके इस सकारात्मक कदम के लिए पुनः धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ। सादर, सार्वजनिक जन-जागरण लेख न्यायिक पारदर्शिता : आशा की नई किरण वर्षों से लंबित बैंक पेंशनर्स के प्रकरण को 25.02.2026 को वरीयता क्रम में सूचीबद्ध किया जाना केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि न्यायिक संवेदनशीलता का प्रतीक है। जब न्यायालय की कार्यप्रणाली पारदर्शी होती है, तब न्याय केवल निर्णय तक सीमित नहीं रहता—वह विश्वास का आधार बनता है।
देशभर के लाखों बैंक पेंशनर्स दशकों से पेंशन अपडेशन के प्रश्न पर न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अनेक वृद्ध पेंशनर्स न्याय की प्रतीक्षा करते-करते इस संसार से विदा हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में सूचीकरण की पारदर्शी प्रणाली और प्राथमिकता निर्धारण न्यायिक व्यवस्था में विश्वास को पुनर्स्थापित करता है।


न्याय में अनावश्यक विलंब केवल प्रक्रिया की समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक पीड़ा का कारण बनता है। यदि “Justice Within Year” जैसी अवधारणा व्यवहार में लागू हो सके तो लाखों परिवारों को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक राहत मिल सकती है।
यह समय केवल धन्यवाद का नहीं, बल्कि अपेक्षा का भी हैकि लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण हो कि वृद्ध एवं आश्रित नागरिकों के मामलों को प्राथमिकता मिले
कि न्यायपालिका की पारदर्शिता निरंतर सुदृढ़ होती रहे न्यायिक व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता ही लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति है। यदि न्याय सुलभ, स्पष्ट और समयबद्ध होगा, तो नागरिकों का विश्वास अडिग रहेगा। आज आवश्यकता है कि न्याय केवल दिया ही न जाए, बल्कि समय पर दिया जाए—क्योंकि विलंबित न्याय, न्याय का क्षरण बन जाता है।