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मध्य प्रदेश: अनावश्यक मुकदमों के लिए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की करी मांग
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वकालत पेशे में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के प्रयास स्वागतयोग्य हैं।
विस्तार
मध्य प्रदेश: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वकालत पेशे में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के प्रयास स्वागतयोग्य हैं। फर्जी वकीलों की पहचान, डिजिटल रजिस्ट्री और पेशेवर आचरण के मानकों पर विचार निश्चित रूप से न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। किन्तु न्याय व्यवस्था की वास्तविक चुनौतियों का एक बड़ा कारण प्रशासनिक स्तर पर व्याप्त लापरवाही और जवाबदेही का अभाव भी है। देशभर में बड़ी संख्या में ऐसे मामले न्यायालयों तक केवल इसलिए पहुंचते हैं क्योंकि संबंधित प्रशासनिक अधिकारी अपने वैधानिक कर्तव्यों का समय पर और निष्पक्षता से निर्वहन नहीं करते। अनेक प्रकरणों में नागरिकों को सामान्य प्रशासनिक कार्यों, रिकॉर्ड सुधार, नामांतरण, निर्माण अनुमति, राजस्व विवादों तथा अन्य वैधानिक अधिकारों के लिए अनावश्यक रूप से न्यायालयों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है।
यदि प्रशासनिक अधिकारी कानून के अनुरूप और निर्धारित समय सीमा में निर्णय लें, तो न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है। न्यायालयों का बहुमूल्य समय उन मामलों में व्यर्थ नहीं होना चाहिए जिन्हें प्रशासनिक स्तर पर ही सुलझाया जा सकता था। इसलिए न्यायिक सुधारों के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। जिन मामलों में न्यायालय यह पाए कि किसी अधिकारी की लापरवाही, मनमानी, दुर्भावना या कानून की स्पष्ट अवहेलना के कारण नागरिक को अनावश्यक मुकदमेबाजी करनी पड़ी, वहां संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने पर गंभीर विचार होना चाहिए। साथ ही, यदि किसी नागरिक को केवल प्रशासनिक त्रुटि या जानबूझकर किए गए विलंब के कारण न्यायालय जाना पड़ा हो, तो न्यायालय द्वारा लगाए गए वाद व्यय (Litigation Cost) की वसूली दोषी अधिकारियों से किए जाने का प्रावधान भी प्रभावी साबित हो सकता है। इससे न केवल नागरिकों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि अधिकारियों में कानून के प्रति उत्तरदायित्व की भावना भी बढ़ेगी। न्याय सस्ता, सुलभ और शीघ्र तभी बन सकता है जब न्यायपालिका, कार्यपालिका और प्रशासन तीनों अपने-अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें। केवल न्यायालयों की संख्या बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा; अनावश्यक मुकदमे उत्पन्न होने के कारणों पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। न्यायालयों का बोझ कम करने का सबसे प्रभावी उपाय है। प्रशासनिक स्तर पर समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह निर्णय व्यवस्था।
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