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राजस्थान: विधायक अशोक कोठारी ने पत्रकार सुरक्षा और कल्याण पर दिया जोर
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संक्षेप
राजस्थान: भीलवाड़ा राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भीलवाड़ा विधायक अशोक कुमार कोठारी ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया जगत की सुरक्षा और कल्याण का मुद्दा पूरी प्रखरता के साथ उठाया।
विस्तार
राजस्थान: भीलवाड़ा राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भीलवाड़ा विधायक अशोक कुमार कोठारी ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया जगत की सुरक्षा और कल्याण का मुद्दा पूरी प्रखरता के साथ उठाया। सदन में पर्ची के माध्यम से अपनी बात रखते हुए विधायक कोठारी ने कहा कि पत्रकार सरकार और जनता के मध्य एक सेतु की तरह कार्य करते हैं। वे न केवल सरकारी नीतियों और जनकल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाते हैं, बल्कि सरकार के अच्छे कार्यों की प्रशंसा के साथ-साथ उसकी त्रुटियों पर आइना दिखाकर व्यवस्था को सुदृढ़ भी करते हैं। कोठारी ने जोर देकर कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण वर्ग की समस्याओं का समाधान करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। सुरक्षा और आवास पत्रकारिता की बुनियादी जरूरत विधायक कोठारी ने अपनी मांगों में सबसे ऊपर पत्रकारों की शारीरिक और सामाजिक सुरक्षा को रखा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों के लिए 'पत्रकार प्रोटेक्शन एक्ट' को अविलंब लागू किया जाए ताकि वे बिना किसी भय के निर्भीक पत्रकारिता कर सकें। इसके साथ ही, उन्होंने प्रदेश के हर शहर में 'पत्रकार कॉलोनी' विकसित करने का सुझाव दिया। जिससे बरसों से किराये के मकानों में रह रहे भूखंड विहीन पत्रकारों को रियायती दर पर जमीन आवंटित हो सके। स्वास्थ्य सुरक्षा और सम्मान निधि का विस्तार पत्रकारों के स्वास्थ्य और सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन को सुरक्षित बनाने हेतु विधायक कोठारी ने आरजेएचएस को पूर्णत आरजीएचएस के समान बनाने की वकालत की। उन्होंने अधिस्वीकृत पत्रकारों के लिए वर्तमान में निर्धारित 5000 रुपये की वार्षिक दवा सीमा में बढ़ोतरी की मांग की। इसके अतिरिक्त उन्होंने पत्रकारों के लिए 'वरिष्ठ पत्रकार सम्मान निधि' के तहत दी जाने वाली मासिक राशि को भी बढ़ाने का पुरजोर समर्थन किया। डिजिटल पत्रकारिता के लिए स्पष्ट नीति और शिक्षा में सहयोग भविष्य की पत्रकारिता का जिक्र करते हुए विधायक अशोक कुमार कोठारी ने कहा कि वर्तमान में एक बड़ा वर्ग डिजिटल मीडिया से जुड़ा है, लेकिन स्पष्ट नीति और नियमों के अभाव में ये पत्रकार प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जैसी सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि डिजिटल पत्रकारिता के लिए भी अविलंब नियम और कानून बनाए जाएं। अंत में, उन्होंने पत्रकारों के बच्चों के भविष्य को लेकर छात्रवृत्ति योजनाओं के सरलीकरण की बात कही, ताकि उनके बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में किसी तकनीकी अड़चन का सामना न करना पड़े। विधानसभा में उठाए गए इन बिंदुओं ने प्रदेश भर के मीडिया कर्मियों के बीच एक नई उम्मीद जगाई है।
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