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उत्तर प्रदेश: बुंदेलखंड दिवस पर अलग राज्य की मांग, पीएम नरेंद्र मोदीको खून से 51वीं बार लिखा खत

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उत्तर प्रदेश  Published by: Ranu , Date: 10/03/2026 10:51:36 am Share:
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  • 10/03/2026 10:51:36 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: महोबा बुंदेलखंड राज्य निर्माण आंदोलन के जनक स्व. शंकर लाल मेहरोत्रा के 79वें जन्मदिन को आज बुंदेलों ने बुंदेलखंड दिवस के रूप में मनाया एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रिकार्ड 51वीं बार अपने खून से खत लिखे। 

विस्तार

उत्तर प्रदेश: महोबा बुंदेलखंड राज्य निर्माण आंदोलन के जनक स्व. शंकर लाल मेहरोत्रा के 79वें जन्मदिन को आज बुंदेलों ने बुंदेलखंड दिवस के रूप में मनाया एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रिकार्ड 51वीं बार अपने खून से खत लिखे। उन्होंने उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के 14 जिलों को पुनः मिलाकर पृथक बुंदेलखंड राज्य बनाने की मांग फिर दोहराई। शहर के आल्हा चौक स्थित अम्बेडकर पार्क में आयोजित प्रधानमंत्री के नाम खून से खत लिखो अभियान में बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर बुंदेलखंडी ने कहा कि बुंदेलखंड राज्य निर्माण के मुद्दे पर राजनीतिक दलों की चुप्पी बेहद चिंताजनक है और इसके लिए यहां के सांसद, विधायक दोषी हैं जो पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने प्रभावी तरीके से मुद्दा उठाने से डरते हैं। तेलंगाना की तरह बुंदेलखंड के सांसद, विधायकों को भी साहस दिखाना होगा। वहां राज्य निर्माण के लिए एक महीने में 96 जनप्रतिनिधियों ने इस्तीफे दे दिये थे।

 

अब बिना कुर्बानी दिये आंदोलन में गति आने वाली नहीं। साथियों के साथ अपने खून से अब तक दो हजार से अधिक खत लिख चुके श्री पाटकर ने कहा कि हम लोग आंदोलन को अपने खून से सींच रहे हैं। जूते-चप्पल त्याग कर 2015 से लगातार नंगे पैर चल रहे हैं और इसी आल्हा चौक पर कोरोना काल के पहले 635 दिन तक अन्न त्याग सत्याग्रह कर चुके हैं। महामंत्री डा. अजय बरसैंया ने कहा कि आंदोलन के लिए जितनी कुर्बानी शंकर लाल मेहरोत्रा ने दी, किसी ने नहीं दी। अगर 22 नवंबर, 2001 को अचानक उनका निधन न हुआ होता तो बहुत पहले बुंदेलखंड राज्य बन गया होता। इस मौके पर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाध्यक्ष दिलीप जैन, कृष्णा शंकर जोशी, कैप्टन देवीदीन यादव, गया प्रसाद कोस्टा, हरीओम निषाद, अमरचंद विश्वकर्मा, कुक्कू शिवहरे, डा. देवेन्द्र, नीरज पुरवार, महेन्द्र, प्रेम चौरसिया, सुधीर दुबे, सिद्धे सेन, भटका गुरू, कमलेश श्रीवास्तव व सुरेश बुंदेलखंडी समेत तमाम बुंदेलों ने अपने रक्त से प्रधानमंत्री को खत लिखे।