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बिहार: बेमौसम बारिश से मक्का-गेहूं की फसलें हुई बर्बाद, किसानों में मचा हाहाकार
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संक्षेप
बिहार: कटिहार जिले के अमदाबाद प्रखंड क्षेत्र में पिछले दो दिनों से जारी बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों के सपनों को पूरी तरह चकनाचूर कर दिया है।
विस्तार
बिहार: कटिहार जिले के अमदाबाद प्रखंड क्षेत्र में पिछले दो दिनों से जारी बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों के सपनों को पूरी तरह चकनाचूर कर दिया है। अचानक बदले मौसम ने जहां एक ओर जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, वहीं दूसरी ओर खेतों में लहलहाती फसलों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। प्रखंड के कई गांवों में सैकड़ों एकड़ में फैली मक्का और गेहूं की फसल अब बर्बादी की कहानी बयां कर रही है। खेतों का नजारा किसी आपदा से कम नहीं है। कुछ दिन पहले तक जहां हरियाली और खुशहाली नजर आती थी, आज वहां गिरी हुई मक्का की फसल और पानी में डूबी गेहूं की बालियां किसानों की बदहाली का दर्द बयान कर रही हैं। तेज हवाओं के चलते मक्का की फसल पूरी तरह जमीन पर गिर गई है, जबकि लगातार बारिश ने गेहूं की फसल को सड़ने की कगार पर पहुंचा दिया है। स्थानीय किसानों के मुताबिक, यह समय फसल कटाई का था और उन्हें अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। लेकिन प्रकृति के इस अचानक बदले मिजाज ने उनकी सालभर की मेहनत को एक झटके में खत्म कर दिया। किसानों का कहना है कि इस बार उन्होंने बेहतर उत्पादन के लिए उन्नत बीज, खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल किया था, जिस पर भारी खर्च हुआ था। इस आपदा से प्रभावित किसानों में सज्जाद खां, शेख मंजर, असलम, समद, शेख मुर्शीद, शेख कालू, शेख हसीम सहित दर्जनों किसान शामिल हैं। इन सभी की कई एकड़ में लगी मक्का और गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। किसानों ने बताया कि उन्होंने खेती के लिए बैंक और साहूकारों से कर्ज लिया था, लेकिन अब फसल नष्ट हो जाने से उनके सामने कर्ज चुकाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। किसानों का दर्द अब आक्रोश में बदलता जा रहा है। उनका कहना है कि हर साल प्राकृतिक आपदाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं, लेकिन सरकारी मदद समय पर नहीं मिलती। कई किसानों ने कहा कि अगर जल्द ही मुआवजा नहीं मिला, तो उनके सामने अपने परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो जाएगा। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि तुरंत क्षेत्र का सर्वे कराया जाए और फसल क्षति का सही आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही किसानों ने सरकार से यह भी मांग की है कि भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचाव के लिए ठोस योजना बनाई जाए, ताकि किसानों को बार-बार इस तरह के नुकसान का सामना न करना पड़े। वहीं, स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का भी कहना है कि प्रशासन को इस मामले में त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन अब तक प्रशासनिक स्तर पर किसी ठोस पहल की जानकारी सामने नहीं आई है, जिससे किसानों में निराशा और नाराजगी बढ़ती जा रही है।ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल फसल का नुकसान नहीं है, बल्कि यह किसानों के सपनों, उनके परिवार की उम्मीदों और उनके भविष्य पर सीधा प्रहार है। अगर समय रहते राहत नहीं मिली, तो इसका असर आने वाले दिनों में और गंभीर रूप से देखने को मिल सकता है। अमदाबाद प्रखंड में बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने एक बार फिर किसानों की असहाय स्थिति को उजागर कर दिया है। आज भी किसान प्रकृति के रहमो-करम पर निर्भर हैं और हर आपदा के बाद मदद की आस में सरकार की ओर टकटकी लगाए रहते हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और सरकार इस गंभीर स्थिति को कितनी गंभीरता से लेते हैं और प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
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