Contact for Advertisement 9919916171


Rajasthan Trending News: नाथद्वारा में 131 फीट ऊंची हनुमानजी की प्रतिमा का किया गया भव्य उद्घाटन

- Photo by : social media

राजस्थान  Published by: Yasoda , Date: 28/03/2026 12:38:30 pm Share:
  • राजस्थान
  • Published by: Yasoda ,
  • Date:
  • 28/03/2026 12:38:30 pm
Share:

संक्षेप

राजस्थान: राजसमंद जिले के नाथद्वारा में रामनवमी के पावन अवसर पर धार्मिक आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।

विस्तार

राजस्थान: राजसमंद जिले के नाथद्वारा में रामनवमी के पावन अवसर पर धार्मिक आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर गिरिराज पर्वत पर 131 फीट ऊंची हनुमानजी की प्रतिमा का भव्य उद्घाटन किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। यह विशाल प्रतिमा न केवल नाथद्वारा बल्कि पूरे राजस्थान में धार्मिक पर्यटन और आस्था का केंद्र बन चुकी है। उद्घाटन समारोह में गुरुदेव राकेशजी, राजचंद्र मिशन और गोस्वामी विशाल बाबा विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ मिलकर हनुमानजी की प्रतिमा का विधिवत पूजन-अर्चन किया और इसे समर्पित किया। समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, भक्तजन और दूर-दराज के क्षेत्रों से आए श्रद्धालु मौजूद थे। सभी ने इस भव्य आयोजन में हिस्सा लेकर भगवान हनुमान के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा व्यक्त की। प्रतिमा के निर्माण के पीछे तीन साल की मेहनत और समर्पण की कहानी है। मूर्तिकार नरेश कुमावत ने बताया कि इस प्रतिमा को बनाने में प्राकृतिक पत्थर और आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। उन्होंने कहा, “हमने इस प्रतिमा को ऐसा आकार और रूप दिया है कि यह दूर से भी देखने वालों को आकर्षित करे और भगवान हनुमान की शक्ति और भक्ति का संदेश दे।”

 

गिरीश भाई शाह, जिन्होंने इस प्रतिमा का निर्माण करवाया। उन्होंने इस परियोजना को पूरा करने में प्रत्येक विवरण का ध्यान रखा। उन्होंने कहा, “यह प्रतिमा केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भक्तों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है। तीन साल की मेहनत और निवेश के बाद यह प्रतिमा पूरी तरह तैयार हुई है। इसका उद्देश्य लोगों को भगवान हनुमान के आदर्शों से जोड़ना और आस्था को बढ़ावा देना है।” समारोह के दौरान श्रद्धालुओं ने प्रतिमा के चारों ओर फूल और दीपक अर्पित किए। कई भक्तों ने अपने हाथों में पुष्प लेकर भगवान हनुमान के चरणों में शीश नवाया। वहीं, कई परिवारों ने अपने बच्चों को भी इस धार्मिक आयोजन में शामिल किया, जिससे यह पर्व और भी सार्थक बन गया।