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उत्तर प्रदेश: जनजातीय पारंपरिक ज्ञान और औषधीय पौधों के संरक्षण पर काम करेगा CSIR-NBRI
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: जनपद सोनभद्र के जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान, औषधीय वनस्पतियों और स्थानीय जैव संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NBRI)
विस्तार
उत्तर प्रदेश: जनपद सोनभद्र के जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान, औषधीय वनस्पतियों और स्थानीय जैव संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NBRI), लखनऊ द्वारा भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की प्रायोजित परियोजना के तहत जिले में निवास करने वाले गोंड, बैगा, पनिका, चेरो और खरवार जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान एवं प्रथाओं का आकलन, दस्तावेजीकरण और संरक्षण किया जाएगा। उनके संरक्षण और खेती की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। स्थानीय जैव संसाधनों के बेहतर उपयोग से भविष्य में अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) की नई संभावनाएं भी विकसित करने पर जोर रहेगा। परियोजना का नेतृत्व CSIR-NBRI के निदेशक डॉ. जहीर अहमद एवं मुख्य वैज्ञानिक डॉ. शरद श्रीवास्तव कर रहे हैं। प्रारंभिक चरण में क्षेत्रीय क्रियान्वयन का कार्य वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मंजूषा श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण में किया जा रहा है। इसमें प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विक्रमा सिंह के साथ अनिल द्विवेदी, अनुपमा देवी और दिव्यान्श राज सहयोग कर रहे हैं। इस पहल से सोनभद्र के जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक स्तर पर संरक्षित करने, औषधीय वनस्पतियों के महत्व को बढ़ावा देने और स्थानीय जैव संसाधनों के माध्यम से जनजातीय आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है।
इसी क्रम में शनिवार को संस्थान के वैज्ञानिकों ने जिलाधिकारी चर्चित गौड़ से मुलाकात कर परियोजना के उद्देश्यों, कार्ययोजना और इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तार से चर्चा की। बैठक में जनजातीय समुदायों की आजीविका को मजबूत बनाने, स्थानीय जैव संसाधनों के समुचित उपयोग और उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
लुप्त हो रहे पारंपरिक ज्ञान का होगा दस्तावेजीकरण परियोजना का प्रमुख उद्देश्य वन क्षेत्रों में निवास करने वाले जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करना है। इसके तहत समुदायों द्वारा दैनिक जीवन में उपयोग किए जाने वाले औषधीय नुस्खों और पारंपरिक औषधीय योगों से संबंधित जानकारियां एकत्रित कर उनका व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जाएगा। इससे पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही सोनभद्र में उपलब्ध दुर्लभ, संकटग्रस्त एवं विलुप्ति के खतरे का सामना कर रहे जैव संसाधनों की पहचान कर उनके संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। औषधीय पौधों की खेती की संभावनाओं को भी तलाशा जाएगा, ताकि स्थानीय संसाधनों के माध्यम से जनजातीय परिवारों के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकें। जनजातीय क्षेत्रों में होगा सर्वेक्षण परियोजना के तहत CSIR-NBRI की वैज्ञानिक टीम जिले के विभिन्न जनजाति बहुल क्षेत्रों का भ्रमण कर सर्वेक्षण करेगी। इस दौरान पारंपरिक ज्ञान एवं प्रथाओं का आकलन करने के साथ स्थानीय औषधीय पौधों की पहचान,