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उत्तर प्रदेश: सच्चे संत धन-वैभव के लिए नहीं, मानव कल्याण के लिए जीते हैं: स्वरूपानंद

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उत्तर प्रदेश  Published by: Gourav Kumar , Date: 01/08/2026 02:54:46 pm Share:
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  • 01/08/2026 02:54:46 pm
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उत्तर प्रदेश: धार्मिक भक्ति समाज के संस्थापक स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज ने कहा कि सच्चे संत मान-सम्मान, धन और वैभव के लिए नहीं, बल्कि मानव कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि नौकरी, व्यवसाय या कोई भी कार्य पूरी ईमानदारी, निष्ठा और धर्म के साथ करना चाहिए। इससे जीवन में भगवान की कृपा बनी रहती है। कस्बे के मंदिर ठाकुरद्वारा स्थित सत्संग भवन में धार्मिक भक्ति समाज की ओर से संध्याकालीन सत्संग का आयोजन किया जा रहा है। गुरुवार देर शाम आयोजित सत्संग में परमहंस वीतराग स्वामी दयानंद गिरी जी महाराज के परम शिष्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ करना चाहिए। चाहे नौकरी हो, निजी व्यवसाय हो या कोई अन्य कार्य, उसे धर्म और सच्चाई के मार्ग पर रहते हुए पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सद्गुरु साक्षात परब्रह्म स्वरूप होते हैं और उच्च कोटि के संत अपने जीवन में मान-अपमान, धन और यश की चिंता नहीं करते, बल्कि भक्तों और मानव समाज के कल्याण के लिए कार्य करते हैं। स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि मनुष्य तप, भक्ति और कर्मयोग के माध्यम से भगवान की प्राप्ति कर सकता है। सत्संग के समापन पर श्रद्धालुओं को रोजाना की तरह प्राणायाम का अभ्यास भी कराया गया।