Contact for Advertisement 9919916171


बिहार: जूट-मखाना किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की पहल, डीएम ने मशीनों के प्रदर्शन का लिया जायजा

- Photo by : social media

बिहार  Published by: Md Firoz Alam , Date: 13/08/2026 11:48:12 am Share:
  • बिहार
  • Published by: Md Firoz Alam ,
  • Date:
  • 13/08/2026 11:48:12 am
Share:

संक्षेप

बिहार: कटिहार जिले के जूट एवं मखाना उत्पादक किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।

विस्तार

बिहार: कटिहार जिले के जूट एवं मखाना उत्पादक किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में जिला पदाधिकारी कटिहार आशुतोष द्विवेदी ने डंडखोरा प्रखंड के सोंती ग्राम का भ्रमण कर जूट डेकोर्टिकेटर मशीन, समेकित कृषि प्रणाली मॉडल और मखाना पॉपिंग मशीन के प्रदर्शन का जायजा लिया। जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेशक, आत्मा कटिहार राजीव कुमार के प्रयास से भारत सरकार की संस्था NINFET, कोलकाता से वैज्ञानिकों के दल को कटिहार बुलाया गया। वैज्ञानिकों ने जूट उत्पादक किसानों के बीच आधुनिक जूट डेकोर्टिकेटर मशीन का प्रदर्शन कर इसके संचालन, उपयोगिता और संभावित लाभों की जानकारी दी।

जिला पदाधिकारी ने किसानों से संवाद कर जूट प्रसंस्करण की प्रक्रिया और मशीन के उपयोग से होने वाले लाभों के बारे में जानकारी ली। उप परियोजना निदेशक शशिकांत झा ने बताया कि मशीन के माध्यम से जूट के तने से रेशा निकालने की प्रक्रिया को कम समय और कम श्रम में पूरा किया जा सकता है। इससे किसानों के समय और श्रम की बचत के साथ मजदूरी लागत कम करने में भी मदद मिल सकती है। मशीन के जरिए कम समय में अधिक मात्रा में जूट का प्रसंस्करण और गुणवत्तापूर्ण रेशा प्राप्त करना संभव है। NINFET, कोलकाता से आए वैज्ञानिकों के दल का नेतृत्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विद्याभूषण शंभू ने किया। वैज्ञानिकों ने किसानों को मशीन की तकनीकी कार्यप्रणाली समझाने के साथ मौके पर इसका व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया।

समेकित कृषि प्रणाली और मखाना पॉपिंग मशीन का निरीक्षण

भ्रमण के दौरान डीएम ने कृषि विभाग के सहयोग से संचालित समेकित कृषि प्रणाली मॉडल का भी निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न कृषि घटकों के समन्वित उपयोग, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और किसानों की आय के विविधीकरण की संभावनाओं की जानकारी ली। इसके अलावा उन्होंने मखाना पॉपिंग मशीन के माध्यम से मखाना गुड़ी से मखाना निकालने की प्रक्रिया का अवलोकन किया। आधुनिक मशीनरी के उपयोग से मखाना प्रसंस्करण में समय और श्रम की बचत तथा मूल्य संवर्धन की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और बेहतर बाजार पर जोर

डीएम आशुतोष द्विवेदी ने किसानों से कहा कि जूट और मखाना जैसी स्थानीय प्रमुख फसलों में केवल उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बेहतर विपणन से जुड़ना जरूरी है। उन्होंने जूट आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों और मखाना के विभिन्न प्रसंस्कृत उत्पादों की संभावनाओं को तलाशने के लिए किसानों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय कृषि उत्पादों की क्षमता बढ़ाकर किसानों को उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन का लाभ दिलाया जा सकता है। इससे किसानों की अतिरिक्त आय के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।


किसान समूह और एफपीओ के माध्यम से तकनीक पहुंचाने के निर्देश

डीएम ने जूट डेकोर्टिकेटर जैसी आधुनिक तकनीकों को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए किसान समूहों, एफपीओ और अन्य सामूहिक संस्थाओं के माध्यम से मशीनों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने जिला कृषि पदाधिकारी को निर्देश दिया कि उपयोगी आधुनिक तकनीकों का व्यापक प्रचार-प्रसार और प्रदर्शन कराया जाए तथा तकनीकी संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर किसानों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाए। कार्यक्रम में प्रखंड कृषि पदाधिकारी शिवानी गुप्ता, उप परियोजना निदेशक शशिकांत झा, कृषि समन्वयक अभिनंदन झा, एटीएम, जनप्रतिनिधि, ग्राम पंचायत के सरपंच संजीव मंडल, पंचायत समिति सदस्य सहित अन्य अधिकारी-कर्मी और बड़ी संख्या में जूट एवं मखाना उत्पादक किसान मौजूद रहे।


Featured News