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गुजरात: तेज रफ्तार पर ढीला शिकंजा, सख्त कानून, कमजोर अमल से बढ़ते हादसे

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गुजरात  Published by: Rajput Ranjeet , Date: 13/04/2026 11:01:50 am Share:
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  • 13/04/2026 11:01:50 am
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संक्षेप

गुजरात: सड़क पर तेज गति (Over-speeding) भारत में दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण है।

विस्तार

गुजरात: सड़क पर तेज गति (Over-speeding) भारत में दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण है। सरकार द्वारा मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 183 के तहत ₹1000-2000 का जुर्माना और आईपीसी की धारा 279 के तहत सजा का प्रावधान होने के बावजूद, कमजोर प्रवर्तन (Enforcement), भ्रष्टाचार और ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी की कमी के कारण अक्सर कार्रवाई नहीं होती है, जिससे हादसे होते हैं। कानूनी प्रावधान और जमीनी हकीकत: नियम सख्त हैं (जैसे सुप्रीम कोर्ट ने धारा 136ए के तहत इलेक्ट्रॉनिक निगरानी अनिवार्य की है), लेकिन जमीनी स्तर पर ट्रैफिक पुलिस की अनियमितता के कारण तेज रफ्तार वाहनों पर लगाम नहीं लग पाती है।


दुर्घटना के कारण अत्यधिक गति, गलत तरीके से ओवरटेक करना, नशे में ड्राइविंग, और मोबाइल का उपयोग प्रमुख मानवीय कारक हैं जो लापरवाही से गाड़ी चलाने (Rash Driving) के तहत आते हैं। ट्रैफिक पुलिस की कमी, खराब सड़क रखरखाव (गड्ढे), और अपर्याप्त साइनेज (Signage) दुर्घटनाओं को बढ़ाते हैं। इन हादसों में निर्दोष लोगों की जान जाती है, और अक्सर दुर्घटना के बाद पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता (Golden Hour) नहीं मिल पाती है। पुलिस द्वारा लगातार हेलमेट, सीटबेल्ट और गति सीमा का पालन करने की अपील की जाती है, लेकिन कड़े जुर्माने के बावजूद प्रवर्तन की कमी सबसे बड़ी समस्या है।