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हरियाणा: भारतीय शिक्षा दर्शन से राष्ट्र निर्माण का संकल्प, हिसार में दो दिवसीय परिचायक वर्ग हुआ संपन्न

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हरियाणा  Published by: Rajput Ranjeet , Date: 29/07/2026 10:33:56 am Share:
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  • 29/07/2026 10:33:56 am
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संक्षेप

हरियाणा: हिसार चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में भारतीय शिक्षण मंडल, हरियाणा प्रांत के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय परिचायक वर्ग कार्यक्रम का समापन हुआ।

विस्तार

हरियाणा: हिसार चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में भारतीय शिक्षण मंडल, हरियाणा प्रांत के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय परिचायक वर्ग कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में सिरसा, फतेहाबाद, हिसार एवं चरखी दादरी सहित विभिन्न जिलों के प्रतिभागियों ने सहभागिता की। समापन समारोह में भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री एवं समाजसेवी श्री बी.आर. शंकरानंद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। नलवा विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री रणधीर पनिहार, लुवास के कुलपति प्रो. विनोद वर्मा तथा एमवीएसयू के कुलपति प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे जबकि हकृवि के कुलपति, प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर जीजेयू के काउंसलिंग एवं प्लेसमेंट सैल के निदेशक डॉ. प्रताप सिंह मलिक, भारतीय शिक्षण मंडल के त्रि-प्रांत संगठन मंत्री डॉ. गणपति तेती एवं अखिल भारतीय मंडल कार्यविभाग प्रमुख डॉ. जितेंद्र भारद्वाज ने भी भारतीय शिक्षा दर्शन, शिक्षा में भारतीयता, संगठन की कार्यपद्धति तथा राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे।


मुख्य अतिथि श्री बी.आर. शंकरानंद ने कहा कि व्यक्ति निर्माण से कुटुंब निर्माण, कुटुंब निर्माण से समाज निर्माण और समाज निर्माण से राष्ट्र निर्माण संभव है। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को तनावपूर्ण बनाने के बजाय आनंदमय, जीवनोपयोगी एवं संस्कारपरक बनाने की आवश्यकता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर चरित्र, संवेदनशीलता, कर्तव्यबोध और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना का विकास करना है। उन्होंने भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय दृष्टिकोण को स्थापित करने तथा शिक्षा को समाज एवं राष्ट्र निर्माण से जोडऩे के लिए किए जा रहे प्रयासों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने कहा कि तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल माध्यमों के कारण शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। ऐसे समय में तकनीकी ज्ञान के साथ मानवीय मूल्यों एवं संस्कारों का विकास भी अत्यंत आवश्यक है। तकनीक व्यक्ति को सक्षम बना सकती है, लेकिन उसे सही दिशा देने का कार्य संस्कार एवं मूल्य ही करते हैं। प्रो. काम्बोज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन आत्मावलोकन करते हुए स्वयं से यह प्रश्न करना चाहिए कि आज उसने क्या सीखा, क्या सिखाया और समाज एवं राष्ट्र के लिए क्या योगदान दिया। नियमित आत्ममूल्यांकन व्यक्ति में निरंतर सुधार की भावना विकसित करता है। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा का विशेष महत्व है। भारत की कृषि परंपरा हजारों वर्षों से प्रकृति, मिट्टी, जल, मौसम, पशुधन एवं जैव विविधता के साथ संतुलन पर आधारित रही है। आवश्यकता है कि पारंपरिक कृषि ज्ञान एवं आधुनिक कृषि विज्ञान का समन्वय किया जाए।


नलवा विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री रणधीर पनिहार ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। उन्होंने शिक्षा में संस्कार, कौशल, नवाचार एवं राष्ट्रबोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में ‘भारतीय शिक्षा दर्शन और शिक्षा में भारतीयता’, ‘कार्य, कार्यक्रम, गतिविधि तथा कार्य विभाग’, ‘छह उत्सव कार्यक्रम विकास’, ‘प्रत्यक्ष मंडल’ तथा ‘मुक्त चर्चा, जिज्ञासा समाधान एवं समापन’ विषयों पर विभिन्न सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में भारतीय शिक्षा दृष्टि, संगठन की कार्यपद्धति, गतिविधियों के विकास तथा शिक्षा के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र निर्माण के विभिन्न आयामों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर राजू शर्मा, डॉ. पवन, मदन, हरमिंदर ने भी अपने व्याख्यान दिए।


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