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मध्य प्रदेश: परीक्षा में देरी पर छात्रों के साथ प्रशासन की जिम्मेदारी भी होगी जरूरी
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: प्रतियोगी परीक्षाओं में समय की पाबंदी आवश्यक है। यदि अभ्यर्थी निर्धारित समय के बाद परीक्षा केंद्र पहुँचता है, तो नियमों के अनुसार उसे प्रवेश नहीं दिया जाता।
विस्तार
मध्य प्रदेश: प्रतियोगी परीक्षाओं में समय की पाबंदी आवश्यक है। यदि अभ्यर्थी निर्धारित समय के बाद परीक्षा केंद्र पहुँचता है, तो नियमों के अनुसार उसे प्रवेश नहीं दिया जाता। इसका उद्देश्य परीक्षा की निष्पक्षता, सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखना है। किंतु प्रश्न तब खड़ा होता है जब अभ्यर्थी समय पर पहुँचने का पूरा प्रयास करे, फिर भी प्रशासनिक अव्यवस्था, गलत सूचना, यातायात प्रबंधन की कमी, केंद्र की पहचान में भ्रम या अन्य प्रशासनिक खामियों के कारण परीक्षा केंद्र तक समय पर न पहुँच पाए। ऐसी स्थिति में केवल विद्यार्थियों को दोषी ठहराना न्यायोचित नहीं कहा जा सकता। यदि परीक्षा केंद्र के बाहर अव्यवस्था हो, प्रवेश प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब हो, पर्याप्त मार्गदर्शन न मिले या प्रशासन द्वारा उचित प्रबंधन न किया गया हो, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन और परीक्षा आयोजन संस्था पर भी बनती है।
सबसे बड़ा नुकसान उस विद्यार्थी का होता है जिसने वर्षों की मेहनत, समय और संसाधन लगाकर परीक्षा की तैयारी की होती है। केवल कुछ मिनटों की देरी, जो उसकी गलती न होकर प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम हो, उसके पूरे शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य को प्रभावित कर सकती है। ऐसी परिस्थितियों में प्रशासन का यह कहना कि "नियम तो नियम हैं" पर्याप्त नहीं माना जा सकता। आवश्यकता इस बात की है कि परीक्षा आयोजक संस्थाएं और स्थानीय प्रशासन परीक्षा दिवस पर विशेष प्रबंधन सुनिश्चित करें। प्रवेश द्वारों की संख्या बढ़ाई जाए, यातायात व्यवस्था सुदृढ़ की जाए, अभ्यर्थियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं तथा यदि देरी प्रशासनिक कारणों से हुई हो तो उसकी निष्पक्ष जांच कर उचित राहत प्रदान की जाए।
नियमों का पालन आवश्यक है, लेकिन नियमों का उद्देश्य विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित करना होना चाहिए, न कि प्रशासनिक कमियों का भार उन पर डालना। यदि किसी अभ्यर्थी को प्रशासनिक लापरवाही के कारण परीक्षा से वंचित होना पड़ता है, तो नैतिक रूप से उसकी जिम्मेदारी केवल विद्यार्थी की नहीं बल्कि संबंधित प्रशासनिक तंत्र और परीक्षा आयोजन संस्था की भी मानी जानी चाहिए। समय की पाबंदी और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों समान रूप से आवश्यक हैं। जब नियमों का कठोर पालन विद्यार्थियों पर लागू होता है, तब प्रशासन की लापरवाही पर भी उतनी ही कठोर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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