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मध्य प्रदेश: बैंक पेंशन अपडेटेशन पर पेंशनरों के साथ अन्याय का आरोप, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

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मध्य प्रदेश  Published by: Kamal Patni , Date: 10/02/2026 12:26:45 pm Share:
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: भारत में बैंक कर्मचारियों की पेंशन कोई अनुकम्पा नहीं, बल्कि सेवा के बदले अर्जित वैधानिक अधिकार है।

विस्तार

मध्य प्रदेश: भारत में बैंक कर्मचारियों की पेंशन कोई अनुकम्पा नहीं, बल्कि सेवा के बदले अर्जित वैधानिक अधिकार है। वर्ष 1995 में जब बैंक कर्मचारी पेंशन योजना लागू की गई, तब यह योजना केवल भविष्य के लिए नहीं थी, बल्कि पूर्व में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को न्याय देने के उद्देश्य से लाई गई थी। यह एक स्थापित तथ्य है कि 1995 में पेंशन लागू करते समय 01.01.1986 के बाद सेवा-निवृत्त हुए बैंक कर्मचारियों/अधिकारियों को पेंशन का लाभ उनकी वास्तविक सेवा-निवृत्ति की तिथि से दिया गया था। अर्थात, पेंशन लागू होने की तिथि से नहीं, बल्कि जिस दिन कर्मचारी रिटायर हुआ, उसी दिन से पेंशन देय मानी गई। यह निर्णय न तो किसी दबाव में था और न ही असंवैधानिक बल्कि यह न्याय, समानता और सेवा के प्रतिफल के सिद्धांत पर आधारित था। आज जब पेंशन अपडेटेशन, DA मर्जर, और समान पेंशन की बात आती है।

 

तब अचानक यह तर्क दिया जा रहा है कि “यह भविष्य से लागू होगी”, “पूर्व प्रभाव नहीं दिया जा सकता”, “यह वित्तीय बोझ है” यदि 1986 के बाद के पेंशनरों को सेवा-निवृत्ति की तिथि से लाभ दिया जा सकता था, तो आज के पेंशनरों को अपडेटेड पेंशन और DA मर्जर उसी सिद्धांत पर क्यों नहीं। कानून और सुप्रीम कोर्ट क्या कहता है। सुप्रीम कोर्ट के अनेक निर्णय स्पष्ट करते हैं कि पेंशन एक सतत अधिकार (Continuing Right) है। पेंशनर और कार्यरत कर्मचारी के बीच मनमाना भेदभाव असंवैधानिक है। सेवा शर्तों में सुधार का लाभ सेवानिवृत्तों तक भी पहुँचना चाहिए। इसके बावजूद, IBA जैसे निजी निकायों द्वारा नियमों की मनमानी व्याख्या, कट-ऑफ डेट का दुरुपयोग और आधे-अधूरे पैटर्न (जैसे सेकंड पेंशन ऑप्शन के अंतर्गत पेंशन सेवानिवृति की दीनांक से लागू  नहीं कर ,केवल सेटलमेंट दिनांक  2009 से लागू करना) पेंशनरों के साथ अन्याय है।