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उत्तर प्रदेश: एथेनॉल प्लांट विवाद पर कंपनी का जवाब, अफवाहों का किया खंडन
- Photo by : social media
विस्तार
उत्तर प्रदेश: बस्ती रुधौली क्षेत्र में प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट को लेकर चल रहे विरोध और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों के बीच अनीता डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड ने प्रेस नोट जारी कर परियोजना से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक किया है। कंपनी ने दावा किया कि प्लांट से संबंधित सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार और पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी की गई हैं तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित कई दावे भ्रामक हैं। कंपनी के अनुसार वर्ष 2021 से जिस भूमि पर परियोजना विकसित की जा रही है, उसकी सभी रजिस्ट्रियां अनीता डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से की गई हैं। कंपनी का कहना है कि नाम में शामिल "डिस्टलरी" शब्द से ही स्पष्ट था कि यहां एथेनॉल उत्पादन इकाई स्थापित की जानी है। भूमि खरीद संबंधित सभी प्रक्रियाएं संबंधित विक्रेताओं की सहमति से पूरी की गईं। कंपनी ने बताया कि परियोजना की विधिवत लोक सुनवाई 20 फरवरी 2025 को तत्कालीन मुख्य राजस्व अधिकारी (सीआरओ) और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी। लोक सुनवाई की सूचना 30 दिन पहले प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित की गई थी। कंपनी के मुताबिक इस दौरान स्थानीय किसान, महिलाएं और अन्य नागरिक मौजूद रहे तथा परियोजना की विस्तृत जानकारी साझा की गई। पर्यावरण और जल संरक्षण को लेकर उठ रहे सवालों पर कंपनी ने कहा कि प्रस्तावित प्लांट जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक पर आधारित होगा। इसके तहत फैक्ट्री से कोई भी दूषित पानी बाहर नहीं छोड़ा जाएगा। उपयोग किए गए पानी का शोधन कर उसे दोबारा उत्पादन प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जाएगा। कंपनी का कहना है कि प्लांट का निर्माण पर्यावरण मंत्रालय और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जा रहा है। कंपनी ने सोशल मीडिया पर वायरल उस दावे का भी खंडन किया, जिसमें एक लीटर एथेनॉल बनाने के लिए 10 हजार लीटर पानी खर्च होने की बात कही जा रही है। कंपनी के अनुसार आधुनिक एथेनॉल संयंत्रों में न्यूनतम जल का उपयोग किया जाता है और अधिकांश पानी का पुनर्चक्रण किया जाता है। साथ ही एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से सरप्लस अनाज और मक्का से किया जाएगा, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। प्रेस नोट के अनुसार प्लांट का लगभग 75 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। कंपनी का दावा है कि परियोजना शुरू होने के बाद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 200 लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही स्थानीय औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। कंपनी ने आमजन से अपील की है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी जानकारी पर विश्वास करने से पहले उसकी आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें। कंपनी का कहना है कि विकास परियोजनाओं का आकलन तथ्यों और वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि अफवाहों के आधार पर।