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उत्तर प्रदेश: विकास के नाम पर बढ़ती अव्यवस्था, जनता परेशान

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उत्तर प्रदेश  Published by: Abhay , Date: 10/04/2026 05:11:06 pm Share:
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: शाहजहांपुर जनपद में अब विकास की रफ्तार इतनी तेज हो गई है कि ट्रिपल इंजन के डब्बे आपस में ही टकराने लगे हैं।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: शाहजहांपुर जनपद में अब विकास की रफ्तार इतनी तेज हो गई है कि ट्रिपल इंजन के डब्बे आपस में ही टकराने लगे हैं। जी हां, यह कोई साधारण ट्रेन नहीं, बल्कि ट्रिपल इंजन वाली विशेष विकसित सुपरफास्ट है जिसमें हर इंजन खुद को ड्राइवर समझता है और हर डब्बा खुद को वीआईपी व तीसरे इंजन का ब्रांड एंबेसडर समझता है। बताया जा रहा है कि तीसरे इंजन में पहले से ही 60 डब्बे जुड़े हुए थे। जनता ने आराम से सीट पकड़ ली थी, कुछ ने खिड़की भी रिजर्व कर ली थी और कुछ तो सफर का मजा लेते हुए चाय-समोसा भी निपटा चुके थे। लेकिन तभी तीसरे इंजन के निर्माण कर्ता (विकास पुरुष) की कृपा दृष्टि पड़ी और उन्होंने सोचा, अरे अभी तो जगह बची है… थोड़ा और विकास ठूंस दो। बस फिर क्या था 10 डब्बे और जोड़ दिए गए। अब समस्या यह नहीं कि डब्बे ज्यादा हो गए… समस्या यह है कि जगह वही पुरानी है। जिन डब्बों के स्टेशन, प्लेटफॉर्म और पोजिशन पहले से तय थे, अब उनमें नए डब्बे भी घुसने की कोशिश कर रहे हैं। नतीजा डब्बे आपस में टकरा रहे हैं और खट-खट की आवाजें लोकतंत्र के संगीत की तरह गूंज रही हैं। पहले जो डब्बे आराम से खड़े थे, अब एक-दूसरे को धक्का दे रहे हैं भाई, ये मेरी जगह है? नहीं, ऊपर से आदेश आया है, अब ये मेरी है?

 

इंजन भी कन्फ्यूज हैं उसे अलग-अलग दिशा में खींचा जा हैं। कोई विकास की पटरी पर दौड़ना चाहता है, कोई श्रेय की पटरी पर, और कोई सीधे चुनावी प्लेटफॉर्म पर ब्रेक लगाना चाहता है। यात्रियों (यानी जनता) की हालत यह है कि वे सीट पकड़कर भगवान को याद कर रहे हैं हे प्रभु यह जब से तीसरी विकास की तीसरी ट्रेन दौड़ी है इसने ऐसी कोई सड़क गली कूंचा नहीं छोड़ा है जहां गढ्डा कर विकास का पानी न बहाया हो, ये ट्रेन मंजिल तक पहुंचे या नहीं, बस हम सुरक्षित उतर जाएं। फिलहाल ट्रिपल इंजन की यह गाड़ी संतुलन नाम के स्टेशन की तलाश में है। लेकिन जिस स्पीड से डब्बे जोड़े जा रहे हैं, लगता है अगला स्टेशन अव्यवस्था जंक्शन ही होगा।