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गुजरात: बलात्कार पर सख्त कानून के बावजूद समस्या बरकरार, सामाजिक बदलाव हुए जरूरी
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संक्षेप
गुजरात: भारत में कानून के सख्त होने के बावजूद बलात्कार की समस्या का समाधान न होना एक गंभीर चिंता है।
विस्तार
गुजरात: भारत में कानून के सख्त होने के बावजूद बलात्कार की समस्या का समाधान न होना एक गंभीर चिंता है। इसका कारण पितृसत्तात्मक मानसिकता, मामलों में देरी, दोषसिद्धि दर (conviction rates) में कमी, और पीड़ित को दोषी ठहराने वाली सामाजिक सोच है। अधिकांश अपराधी पीड़िता के परिचित होते हैं, जिससे न्याय प्रक्रिया और जटिल हो जाती है। कानूनी खामियां और सजा में देरी: निर्भया मामले के बाद कानून सख्त (मौत की सजा तक) हुए, लेकिन पुलिसिया जांच में कमी और अदालती कार्यवाही में देरी के कारण दोषसिद्धि की दर बहुत कम है। पितृसत्तात्मक और रूढ़िवादी सोच: समाज में महिलाओं के खिलाफ हिंसा को अक्सर सामान्य मान लिया जाता है। पीड़ित को ही दोषी ठहराना (victim-blaming) और उन्हें चुप कराना, अपराध को बढ़ावा देता है। परिचितों द्वारा बलात्कार: NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 93% से अधिक मामलों में बलात्कारी पीड़ित का परिचित (रिश्तेदार, मित्र, पड़ोसी) होता है, जिससे मामले को दबाने का दबाव बनता है।
कानून से ज़्यादा सामाजिक बदलाव की ज़रूरत: केवल कठोर सजा काफी नहीं है। जब तक शिक्षा और परवरिश के माध्यम से लैंगिक समानता और सम्मान (respect) को बढ़ावा नहीं दिया जाता, तब तक बलात्कार की संस्कृति को खत्म करना मुश्किल है।
पीड़ितों का समर्थन: पीड़ितों को न्याय और सामाजिक सहयोग मिलने में कठिनाई होती है, जिससे वे रिपोर्ट करने से हिचकिचाती हैं। समाज को यौन हिंसा के प्रति संवेदनहीनता छोड़नी होगी। स्कूल-स्तर से ही लैंगिक समानता की शिक्षा, त्वरित न्याय प्रणाली, और महिलाओं को सशक्त बनाकर ही इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान संभव है।
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