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गुजरात: बिजली पोल और हाईटेंशन लाइनों को लेकर किसानों ने उठाई मुआवजे व अधिकारों की मांग
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संक्षेप
गुजरात: राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों ने आरोप लगाया है कि उनकी कृषि भूमि, खेतों और वाड़ियों में बिना अनुमति बिजली के पोल तथा निजी कंपनियों की हाईटेंशन विद्युत लाइनों के खंभे लगाए जा रहे हैं।
विस्तार
गुजरात: राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों ने आरोप लगाया है कि उनकी कृषि भूमि, खेतों और वाड़ियों में बिना अनुमति बिजली के पोल तथा निजी कंपनियों की हाईटेंशन विद्युत लाइनों के खंभे लगाए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी सहमति के बिना किए जा रहे इन कार्यों से खेती योग्य भूमि और फसलों को नुकसान पहुंच रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है। किसानों के अनुसार कई स्थानों पर निजी बिजली कंपनियां और संबंधित एजेंसियां उनकी जमीन पर मनमाने तरीके से कार्य कर रही हैं। उनका आरोप है कि विरोध करने पर किसानों को पुलिस बल की मौजूदगी में खेतों और वाड़ियों से बाहर किया जाता है तथा अपनी ही भूमि पर जाने से रोका जाता है। किसानों ने इसे अन्यायपूर्ण और दमनकारी रवैया बताया है। किसानों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं को जनप्रतिनिधियों, विधायकों, सांसदों और संबंधित विभागों के समक्ष कई बार उठाया, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकला है। उनका आरोप है कि सरकार और प्रशासन किसानों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, जिसके चलते उन्हें आंदोलन और किसान सम्मेलन आयोजित करने पड़ रहे हैं। किसानों ने कहा कि हाईटेंशन लाइनों के बड़े-बड़े पोल कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा घेर लेते हैं, जिससे उस क्षेत्र में खेती करना संभव नहीं रह जाता। उनका मानना है कि इससे भूमि की उत्पादकता प्रभावित होती है और किसानों की आय पर भी असर पड़ता है। उन्होंने मांग की कि यदि किसी किसान की भूमि से बिजली लाइनें गुजरती हैं तो उसे उचित और सम्मानजनक मुआवजा दिया जाए। किसानों ने यह भी मांग की कि जिन परिवारों की जमीन पर बिजली पोल और हाईटेंशन लाइनें स्थापित की जाती हैं, उनके परिवार के सदस्यों को संबंधित कंपनियों में रोजगार के अवसर दिए जाएं। साथ ही बिजली कंपनियों द्वारा अर्जित लाभ में किसानों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाए। खेती की बढ़ती लागत पर चिंता जताते हुए किसानों ने कहा कि बीज, खाद, कीटनाशक, कृषि उपकरण और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जबकि फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा। उन्होंने फसल बीमा और अन्य कृषि योजनाओं के लाभ समय पर उपलब्ध कराने की भी मांग की। इस बीच न्याय एवं अधिकार समिति के प्रदेश अध्यक्ष परसोतमभाई एन. मुंगरा ने किसानों से एकजुट होकर अपने संवैधानिक अधिकारों, उचित मुआवजे और सम्मान के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसानों को संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए, ताकि उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
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