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राजस्थान: निवाई यूनिवर्सिटी में ACB की रेड, रिश्वत लेते प्रोफेसर हुआ गिरफ्तार

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राजस्थान  Published by: Shahihurehman , Date: 22/05/2026 03:24:32 pm Share:
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  • 22/05/2026 03:24:32 pm
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संक्षेप

राजस्थान: टोंक जिले के निवाई स्थित डॉ. केएन मोदी यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की बड़ी कार्रवाई से शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया।

विस्तार

राजस्थान: टोंक जिले के निवाई स्थित डॉ. केएन मोदी यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की बड़ी कार्रवाई से शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया। एसीबी टीम ने यूनिवर्सिटी के बीएड विभाग में छापा मारते हुए विभागाध्यक्ष (HOD) मीनू मंगल और प्रोफेसर रमेश मीणा को ₹20 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। कार्रवाई के बाद यूनिवर्सिटी परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और विभागीय कर्मचारियों में खलबली मच गई। जानकारी के अनुसार, बीएड विभाग के एक छात्र ने एसीबी को शिकायत दी थी कि उसकी अनुपस्थिति (एब्सेंट) को सेटल करने और हाजिरी पूरी दिखाने के बदले उससे रिश्वत की मांग की जा रही है। छात्र ने आरोप लगाया कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी उसके रिकॉर्ड को सही करने के लिए ₹20 हजार की मांग कर रहे थे। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले का सत्यापन किया और आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई की योजना बनाई।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पूरी रणनीति के साथ जाल बिछाया। जैसे ही रिश्वत की राशि का लेन-देन हुआ, एसीबी टीम ने मौके पर दबिश देकर दोनों आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया। इस कार्रवाई का नेतृत्व एएसपी ऋषिकेश मीणा ने किया, जबकि पूरी कार्रवाई एसीबी के डीआईजी नारायण टोगस के सुपरविजन में संपन्न हुई। छापेमारी के दौरान एसीबी के अधिकारियों और जाब्ते ने यूनिवर्सिटी परिसर के कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की भी जांच की। सूत्रों के अनुसार, टीम को लंबे समय से इस क्षेत्र में भ्रष्टाचार और पैसों के लेन-देन की गोपनीय शिकायतें मिल रही थीं। कार्रवाई के बाद कई रसूखदारों में भी बेचैनी देखी गई और यूनिवर्सिटी प्रशासन पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

फिलहाल एसीबी की टीम आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही यूनिवर्सिटी के अन्य रिकॉर्ड और फाइलों की भी जांच जारी है। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा जगत में चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि शिक्षा संस्थानों में ही इस तरह भ्रष्टाचार होगा तो छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा। वहीं एसीबी ने साफ संकेत दिए हैं कि प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।