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राजस्थान: ग्राम पंचायत विकास योजना में बच्चों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने पर दिया गया जोर

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राजस्थान  Published by: Shahihurehman , Date: 21/08/2026 01:03:32 pm Share:
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  • 21/08/2026 01:03:32 pm
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संक्षेप

राजस्थान: शिव शिक्षा समिति, राणोली द्वारा कवच परियोजना के अंतर्गत ब्लॉक स्तरीय बाल संरक्षण समिति (BLCPC) के सदस्यों का क्षमता वर्धन कार्यक्रम  पंचायत समिति के नविन सभागार  पीपलू  में आयोजित किया गया।

विस्तार

राजस्थान: शिव शिक्षा समिति, राणोली द्वारा कवच परियोजना के अंतर्गत ब्लॉक स्तरीय बाल संरक्षण समिति (BLCPC) के सदस्यों का क्षमता वर्धन कार्यक्रम  पंचायत समिति के नविन सभागार  पीपलू  में आयोजित किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता सहायक विकास अधिकारी हेमराज सोलंकी, सहायक विकास अधिकारी प्रहलाद राम बैरवा द्वारा की गई। कार्यशाला में बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों, समिति की भूमिका तथा पंचायत स्तर पर बाल संरक्षण गतिविधियों को प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई।  कार्यक्रम में संस्था एवं कवच परियोजना के संबंध में जानकारी देते हुए कार्यक्रम प्रबंधक सीताराम शर्मा ने बताया कि बाल संरक्षण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि विभिन्न विभागों, पंचायतों, समुदाय एवं संबंधित हितधारकों के समन्वित प्रयास से ही बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।


 उन्होंने BLCPC की संरचना, भूमिका एवं जिम्मेदारियों के साथ-साथ पंचायत स्तर पर बच्चों से जुड़े मुद्दों की पहचान, समीक्षा एवं संबंधित विभागों के साथ समन्वय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण में GPDP 2026–27 एवं बाल हितैषी पंचायत की अवधारणा पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि पंचायत विकास योजना में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास एवं भागीदारी से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। स्कूल से बाहर बच्चों एवं ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान, बाल विवाह एवं बाल श्रम की रोकथाम, बाल तस्करी की रोकथाम, बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण, सेफ्टी ऑडिट, बाल सभा तथा सरकारी योजनाओं एवं सामाजिक सुरक्षा सेवाओं से बच्चों को जोड़ने जैसे विषयों को पंचायत की योजना में शामिल करने पर जोर दिया गया।  कार्यशाला के दौरान BLCPC की भूमिका को समस्या की पहचान से लेकर योजना एवं कार्यवाही  तक समझाया गया। इसमें पंचायत  संरक्षण समिति एवं बाल समूह के माध्यम से मुद्दों की पहचान, BLCPC में समीक्षा, संबंधित विभागों से समन्वय, पंचायत को सुझाव तथा ग्राम सभा एवं GPDP में प्राथमिकता के रूप में शामिल कराने की प्रक्रिया पर चर्चा हुई।


इस अवसर पर सहायक विकास अधिकारी हेमराज सोलंकी, सहायक विकास अधिकारी प्रहलाद राम बैरवा ने कहा कि बच्चों से जुड़े मुद्दों को केवल बैठकों एवं चर्चाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उनकी पहचान कर संबंधित विभागों तक पहुंचाते हुए समाधान की दिशा में ठोस कार्यवाही की जानी चाहिए। उन्होंने पंचायत स्तर पर बाल संरक्षण को मजबूत करने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।  कार्यशाला में प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्र में बच्चों से जुड़ी प्रमुख समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए आवश्यक विभागीय समन्वय एवं GPDP में शामिल की जाने वाली गतिविधियों पर समूह चर्चा की। प्रशिक्षण के दौरान BLCPC को आगामी एक वर्ष के लिए बाल संरक्षण एवं कन्वर्जेंस से जुड़ी प्राथमिक गतिविधियां तय करने तथा उनके लिए जिम्मेदार विभाग, समय-सीमा, संसाधन एवं सफलता के संकेतक निर्धारित करने पर भी जोर दिया गया। साथ पंचायत डायरी द्वारा बच्चों से  सूचनाओं का संग्रहण कर सम्बंधित स्तर पर रिपोर्ट  कहा  गया।  


जिला समन्वयक पूनम जोनवाल ने बताया की कार्यक्रम का उद्देश्य ब्लॉक स्तर पर बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करना तथा यह सुनिश्चित करना रहा कि बच्चों से जुड़े मुद्दे पंचायत की विकास प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनें। कार्यशाला में संबंधित विभागों एवं समिति के सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही। इस दौरान सहायक विकास अधिकारी हेमराज सोलंकी, सहायक विकास अधिकारी प्रहलाद राम बैरवा, महिला एवं बाल विकास विभाग से ललिता साहू, ब्लॉक शिक्षा विभाग से गिरराज वैष्णव तथा परियोजना टीम से एमआईएस अधिकारी अंकित सिंहाग, रामकल्याण जाट एवं अन्य सदस्य उपस्थित रहे।