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उत्तर प्रदेश: फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाने साइबर ठगों का पर्दाफाश , 7 आरोपी गिरफ्तार
- Photo by : social media
विस्तार
उत्तर प्रदेश: साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नोएडा पुलिस ने एक बड़े नेटवर्क का खुलासा कर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे और बाद में इन बैंक खातों को साइबर अपराधियों को बेच देते थे। इन खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट और ट्रेडिंग-इन्वेस्टमेंट फ्रॉड के जरिए लोगों से ठगी गई रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी करने वाले गिरोह के सदस्य लोगों को अलग-अलग तरीकों से अपने जाल में फंसाकर बड़ी रकम की धोखाधड़ी करते थे। ठगी के बाद रकम को सीधे अपने खातों में लेने के बजाय ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था, जिन्हें गिरफ्तार आरोपी कथित तौर पर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे। इस तरह ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर उसकी पहचान छिपाने की कोशिश की जाती थी। जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि आरोपी बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबरों पर विशेष APK इंस्टॉल कराते थे। आरोप है कि इस APK के जरिए बैंक खातों में आने वाले OTP और मैसेज तक पहुंच हासिल की जाती थी। इससे साइबर अपराधियों के लिए बैंक खातों को संचालित करना और ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर या निकालना आसान हो जाता था। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, एक चेकबुक, चार लेटरहेड और एक स्टैंप बरामद किया है। बरामद सामान के आधार पर पुलिस मामले की जांच को आगे बढ़ा रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं। पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपियों से जुड़े बैंक खातों के माध्यम से किए गए साइबर फ्रॉड को लेकर देशभर में 74 शिकायतें दर्ज हैं। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह नेटवर्क लंबे समय से साइबर अपराधियों के लिए बैंक खातों की व्यवस्था करने में सक्रिय हो सकता है। फिलहाल थाना फेस-3 पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी किन-किन साइबर अपराधियों के संपर्क में थे और ठगी की रकम को किस तरह अलग-अलग खातों के जरिए ट्रांसफर किया जाता था। साथ ही, पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में भी जुटी हुई है।