-
☰
छत्तीसगढ़: कोरबा में पीडीएस चावल की गुणवत्ता पर उठे सवाल, राइस मिलों की मिलिंग और बिजली खपत की जांच की मांग
- Photo by : social media
विस्तार
छत्तीसगढ़: जिले के दीपका क्षेत्र समेत कई इलाकों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत वितरित किए जा रहे चावल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आए फोटो और वीडियो के आधार पर कुछ राशन दुकानों में खराब, कीड़े लगे और गंदगीयुक्त चावल मिलने के दावे किए जा रहे हैं। मामले को लेकर संबंधित विभागों से खाद्यान्न के नमूने की जांच कराने और पूरी आपूर्ति श्रृंखला की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। बताया जा रहा है कि कटघोरा-पाली क्षेत्र की कुछ राइस मिलों से संबंधित बोरियों पर सीजीएससीएससी लिमिटेड, श्रीराम एग्रो, कटघोरा और सीएमआर लॉट नंबर 18764 जैसी जानकारी अंकित है। इसी लॉट के चावल की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, चावल की वास्तविक गुणवत्ता और उसमें किसी तरह की गड़बड़ी की पुष्टि सक्षम प्रयोगशाला जांच के बाद ही हो सकेगी। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि पीडीएस में मिलने वाले सब्सिडी वाले खाद्यान्न की कथित अवैध खरीद-बिक्री और उसे दोबारा राइस मिलों तक पहुंचाने का नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। आरोप है कि कुछ बिचौलियों द्वारा हितग्राहियों से चावल कम कीमत पर खरीदा जाता है और बाद में इसे अलग-अलग माध्यमों से एकत्र कर राइस मिलों तक पहुंचाया जाता है। इन दावों के बीच कस्टम मिलिंग प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ मिलों में शासन की ओर से मिलिंग के लिए उपलब्ध कराए गए धान की वास्तविक मिलिंग के बजाय उसे खुले बाजार में खपाने और उसके स्थान पर पुराने पीडीएस चावल को नई बोरियों में भरने की आशंका जताई जा रही है। यह आरोप फिलहाल जांच का विषय है और इसकी पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी। पूरे मामले में राइस मिलों की बिजली खपत और मीटर रीडिंग को भी महत्वपूर्ण जांच बिंदु बताया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया गया है कि यदि बड़ी मात्रा में धान की मिलिंग की गई है तो औद्योगिक मशीनों के संचालन के अनुरूप बिजली की खपत रिकॉर्ड में दिखाई देनी चाहिए। ऐसे में संबंधित मिलों के बिजली बिल, मीटर रीडिंग और उत्पादन रिकॉर्ड का मिलान करने की मांग की जा रही है। इसके अलावा सृष्टि मेडिकल कॉलेज के पास स्थित छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के भंडारण केंद्र में पहुंचने वाले चावल की गुणवत्ता जांच को लेकर भी सवाल उठे हैं। मांग की जा रही है कि संबंधित लॉट के नमूने स्वतंत्र प्रयोगशाला से जांच कराए जाएं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खाद्यान्न निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है या नहीं। मामले में खाद्य विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम, मार्कफेड और मंडी प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। राशन दुकानों के निरीक्षण, खाद्यान्न के उठाव और वितरण की प्रक्रिया के साथ-साथ कस्टम मिलिंग तथा भौतिक सत्यापन की व्यवस्था की जांच की मांग की गई है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी स्तर पर पीडीएस के चावल में मिलावट, हेराफेरी, अवैध खरीद-बिक्री या फर्जी मिलिंग जैसी अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही गरीब और जरूरतमंद परिवारों को गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। मामले को लेकर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की गई है कि दीपका सहित जिले की राशन दुकानों में उपलब्ध संदिग्ध स्टॉक के नमूने लेकर उनकी लैब जांच कराई जाए। इसके साथ ही संबंधित राइस मिलों के बिजली खपत रिकॉर्ड, धान आवंटन, मिलिंग उत्पादन, परिवहन और नान गोदाम में जमा खाद्यान्न के रिकॉर्ड का आपस में मिलान कराया जाए। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए जा रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है और किसी स्तर पर अनियमितता हुई है या नहीं।
पंजाब: अमृतसर में अवैध हथियार सप्लाई नेटवर्क का भंडाफोड़, AK-47 समेत 3 आरोपी गिरफ्तार
मध्य प्रदेश: मुरैना के अंश सिंह तोमर बने सेना में लेफ्टिनेंट, धर्मगढ़ गांव में खुशी का माहौल
मध्य प्रदेश: बैंक पेंशनर्स ने CJI से पेंशन अपडेशन मामले की शीघ्र सुनवाई की लगाई गुहार
उत्तर प्रदेश: 13 सितंबर को ईश्वरीय स्नेह मिलन कार्यक्रम में मीडिया बंधुओं का होगा सम्मान