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दिल्ली: छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक मंच न बनाया जाए, आचार्य डॉ. संजय मुनि का बयान
- Photo by : social media
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दिल्ली: क्रांतिकारी राष्ट्र संत आचार्य श्री डॉ. संजय मुनि महाराज ने दिल्ली में चल रहे छात्र प्रदर्शनों और उनके बदलते स्वरूप पर चिंता जताते हुए कहा है कि छात्रों के अधिकारों के लिए शुरू हुआ आंदोलन अब अपने मूल उद्देश्य से भटककर राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है। उन्होंने युवाओं से किसी भी राजनीतिक दल के प्रभाव में आने से बचने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। जारी प्रेस विज्ञप्ति में आचार्य डॉ. संजय मुनि ने कहा कि आंदोलन का मुख्य मुद्दा NEET अब पीछे छूटता नजर आ रहा है और इसकी जगह कथित रूप से देश विरोधी नारे तथा राजनीतिक गतिविधियां चर्चा का विषय बन गई हैं। उनका कहना है कि छात्रों के मंच का उपयोग किसी भी प्रकार की राजनीतिक या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने आंदोलन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन और 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च का उल्लेख करते हुए इसे पूर्व नियोजित राजनीतिक रणनीति बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े कुछ घटनाक्रमों ने इसके राजनीतिक स्वरूप को और स्पष्ट किया है। आचार्य डॉ. संजय मुनि ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें यह समझना चाहिए कि कहीं वे राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल तो नहीं हो रहे हैं। उन्होंने युवाओं से विवेकपूर्ण निर्णय लेने और किसी भी तरह के बहकावे से बचने की अपील की। प्रेस विज्ञप्ति में यह भी दावा किया गया कि आंदोलन में छात्रों की तुलना में बाहरी लोगों की भागीदारी बढ़ती दिखाई दे रही है, जिससे आंदोलन की मूल भावना प्रभावित हो रही है। हालांकि इन दावों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन नहीं हुआ है। आचार्य डॉ. संजय मुनि ने अंत में लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करते हुए कहा कि सभी नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण, अहिंसक और कानून के दायरे में होना चाहिए। उन्होंने देश में शांति, सामाजिक सौहार्द और अहिंसा बनाए रखने की अपील की।