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झारखण्ड: NTPC के कन्वेयर क्रशर संचालन का किया विरोध, ग्रामीणों में बढ़ा दिखा आक्रोश

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झारखण्ड  Published by: Md Samir , Date: 13/07/2026 01:26:49 pm Share:
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  • 13/07/2026 01:26:49 pm
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झारखण्ड: झारखंड के हजारीबाग जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र स्थित पाण्डु गांव में NTPC की कोयला खनन परियोजना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने उनकी सहमति और पूर्व सूचना के बिना कन्वेयर क्रशर का संचालन शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि इस फैसले से आसपास के गांवों में प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने की आशंका है, जिससे लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है। ग्रामीणों के अनुसार, इससे पहले जब कन्वेयर क्रशर को लेकर सवाल उठाए गए थे, तब कंपनी प्रबंधन ने इसे केवल ट्रायल संचालन बताया था। हालांकि अब बिना किसी सार्वजनिक संवाद, ग्राम सभा की सहमति या स्थानीय समस्याओं के समाधान के इसे नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पाण्डु, बेंगवारी और आसपास के कई गांव इस परियोजना से सीधे प्रभावित हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि परियोजना शुरू हुए लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद कोयला परिवहन और क्रशिंग के दौरान उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त और स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। उनका कहना है कि लगातार उड़ती धूल और बढ़ते प्रदूषण के कारण बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। लोगों ने सांस संबंधी बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका भी जताई है।ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कंपनी का पूरा ध्यान केवल उत्पादन बढ़ाने पर केंद्रित है, जबकि स्थानीय लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। कन्वेयर क्रशर के संचालन से धूल के साथ-साथ शोर और कंपन की समस्या भी बढ़ गई है, जिससे लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।

इसके अलावा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, सुरक्षा उपायों और मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अब तक इन मुद्दों पर कोई ठोस पहल नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के साथ स्थानीय लोगों के अधिकारों, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का भी समान रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए। ग्रामीणों ने संबंधित प्रशासन और कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए, प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय लागू किए जाएं तथा स्थानीय लोगों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी सहमति और सुझावों को महत्व दिया जाए।