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झारखण्ड: सुब्रतो कप फुटबॉल प्रतियोगिता के आयोजन पर उठे सवाल, पारदर्शिता की जांच की हुई मांग
- Photo by : social media
विस्तार
झारखण्ड: पलामू जिले के तरहसी प्रखंड में आयोजित 65वीं सुब्रतो कप फुटबॉल प्रतियोगिता (2026-27) एवं द्वितीय लिटिल चैंप्स फुटबॉल टूर्नामेंट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय खेल प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कुछ जनप्रतिनिधियों ने प्रतियोगिता के आयोजन, खिलाड़ियों के चयन, समय निर्धारण तथा सरकारी राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। जानकारी के अनुसार, प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) तरहसी द्वारा जारी पत्रांक-128, दिनांक 3 जुलाई 2026 के आधार पर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। आरोप है कि आयोजन प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती गई और विद्यालयों व खिलाड़ियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय भी नहीं दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जल्दबाजी में प्रतियोगिता आयोजित किए जाने से ग्रामीण क्षेत्रों के कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर नहीं मिल पाया। प्रतियोगिता की तिथियों को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रखंड स्तरीय प्रतियोगिता 7 जुलाई को आयोजित की गई, जबकि जिला स्तरीय प्रतियोगिता 8 जुलाई से निर्धारित है। ऐसे में एक ही दिन के भीतर खिलाड़ियों का चयन, टीम गठन और आवश्यक तैयारियां पूरी करने को लेकर चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इतने बड़े सरकारी खेल आयोजन की सूचना कई जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों तक समय पर नहीं पहुंचाई गई। उनका कहना है कि सामान्यतः ऐसे आयोजनों में प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रहती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है। इस बार उनकी अनुपस्थिति को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं हो रही हैं। विवाद का एक अन्य कारण प्रतियोगिता का समय भी बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस दिन प्रतियोगिता आयोजित हुई, उसी दिन कई विद्यालयों में परीक्षाएं भी चल रही थीं। इससे प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। अभिभावकों ने मांग की है कि यदि किसी छात्र की परीक्षा छूटी है तो उसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आयोजन स्थल पर मुख्य रूप से प्रतिनियुक्त शिक्षक ही व्यवस्थाएं संभालते नजर आए, जबकि कई वरिष्ठ अधिकारी कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे। इसे लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय खेल प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि प्रतियोगिता के आयोजन, खिलाड़ियों के चयन और सरकारी धन के उपयोग की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन पूरी पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के तहत हो सके। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक इस पूरे मामले पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका था। अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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