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मध्य प्रदेश: सरकारी दफ्तरों के चक्कर बंद करो, जनता की पीएम मोदी से समयबद्ध समाधान की करी बड़ी मांग
- Photo by : social media
संक्षेप
मध्य प्रदेश: जनता का संदेश माननीय प्रधानमंत्री जी के नाम माननीय प्रधानमंत्री जी,सादर प्रणाम।
विस्तार
मध्य प्रदेश: जनता का संदेश माननीय प्रधानमंत्री जी के नाम माननीय प्रधानमंत्री जी,सादर प्रणाम। देश की आम जनता आज आपसे एक महत्वपूर्ण विनम्र निवेदन करना चाहती है। डिजिटल इंडिया, पारदर्शिता और सुशासन की आपकी सोच तभी पूर्ण रूप से सफल मानी जाएगी, जब आम नागरिक को अपने ही कार्यों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। आज स्थिति यह है कि एक छोटे से प्रमाण पत्र, नामांतरण, भवन अनुमति, पेंशन, शिकायत या राजस्व कार्य के लिए नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। पेट्रोल-डीजल, समय और मेहनत की भारी बर्बादी होती है। बुजुर्ग, महिलाएँ, किसान और मजदूर सबसे अधिक परेशान होते हैं। कई बार अधिकारी अनुपस्थित मिलते हैं या आवेदन महीनों तक लंबित रखे जाते हैं। जनता का विनम्र सुझाव है कि आवेदन स्वीकार होने के बाद जिम्मेदारी विभाग की मानी जाए। यदि किसी नागरिक का आवेदन विभाग द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है, तो उसके बाद आवश्यक अनुमति, जांच और कार्यवाही समय सीमा में करना संबंधित विभाग और अधिकारी की जिम्मेदारी तय हो। एक आवेदन निश्चित समय में समाधान व्यवस्था लागू हो हर विभाग में अधिकतम समय सीमा तय हो। देरी होने पर जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय हो। नागरिक को बार-बार उपस्थित होने के लिए बाध्य न किया जाए। ऑनलाइन स्थिति और कारण स्पष्ट दिखाए जाएँ। बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष व्यवस्था हो 65 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों, महिलाओं और दिव्यांगों के कार्य प्राथमिकता से घर बैठे या एकल खिड़की प्रणाली से किए जाएँ। सरकारी कार्यों में अनावश्यक दौड़ समाप्त हो न्यूनतम सरकार अधिकतम शासन का वास्तविक अर्थ तभी होगा जब नागरिक का समय, धन और सम्मान सुरक्षित रहेगा।
माननीय प्रधानमंत्री जी, देश की जनता चाहती है कि सरकारी व्यवस्था जनता की सुविधा के लिए चले, न कि जनता सरकारी कार्यालयों की परिक्रमा करती रहे। यदि प्रशासनिक जवाबदेही और समयबद्ध सेवा कानून को सख्ती से लागू किया जाए, तो भ्रष्टाचार भी कम होगा और जनता का विश्वास भी मजबूत होगा। जनता की ओर से विनम्र अपील सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं, समय पर समाधान हमारा अधिकार बने।