Contact for Advertisement 9919916171


राजस्थान: अंजली माल्या और सौरव पारले का दहेज-मुक्त विवाह, समाज को प्रेरक संदेश

- Photo by : social media

राजस्थान  Published by: Anil , Date: 23/02/2026 03:35:35 pm Share:
  • राजस्थान
  • Published by: Anil ,
  • Date:
  • 23/02/2026 03:35:35 pm
Share:

संक्षेप

राजस्थान: जयपुर समाजसेवी, प्रख्यात आर्किटेक्ट और A-One Architects Pvt. Ltd. के निदेशक डॉ. दौलत राम माल्या की सुपुत्री अंजली माल्या तथा सौरव पारले का विवाह पूर्णतः दहेज-मुक्त होकर संपन्न हुआ। यह न केवल दो सशक्त परिवारों का भावनात्मक मिलन है, बल्कि दहेज प्रथा जैसी घातक सामाजिक बुराई के खिलाफ एक सशक्त और व्यावहारिक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।

विस्तार

राजस्थान: जयपुर समाजसेवी, प्रख्यात आर्किटेक्ट और A-One Architects Pvt. Ltd. के निदेशक डॉ. दौलत राम माल्या की सुपुत्री अंजली माल्या तथा सौरव पारले का विवाह पूर्णतः दहेज-मुक्त होकर संपन्न हुआ। यह न केवल दो सशक्त परिवारों का भावनात्मक मिलन है, बल्कि दहेज प्रथा जैसी घातक सामाजिक बुराई के खिलाफ एक सशक्त और व्यावहारिक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। अंजली माल्या, एक प्रतिभाशाली आर्किटेक्ट और अर्बन प्लानर हैं। वे वर्तमान में मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT), जयपुर में स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत AMRUT (Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation) प्रोजेक्ट में जूनियर रिसर्च फेलो के रूप में कार्यरत हैं। उनकी शिक्षा और शोध कार्य शहरों के सतत विकास, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी नियोजन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित हैं। वहीं वर सौरव पारले डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI), मुंबई में इंटेलिजेंस ऑफिसर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके पिता श्री भानु प्रकाश पारले सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। दोनों परिवारों की शैक्षिक और व्यावसायिक पृष्ठभूमि अत्यंत सम्मानजनक और प्रेरणादायक है। यह भव्य एवं सादगीपूर्ण विवाह समारोह 20 फरवरी 2026 को जयपुर के केसर महल गार्डन में संपन्न हुआ। समारोह में उपस्थित परिवारजनों, रिश्तेदारों, मित्रों और गणमान्य अतिथियों ने इस दहेज-रहित विवाह की खुले दिल से सराहना की तथा इसे सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक मजबूत कदम बताया।

 

 डॉ. दौलत राम माल्या ने भावुक होते हुए कहा, “दहेज एक सामाजिक अभिशाप है, जो न केवल बेटियों के परिवार पर आर्थिक बोझ डालता है, बल्कि विवाह को सच्चे प्रेम, सम्मान और आपसी समझ के बजाय लेन-देन का माध्यम बना देता है। हमने अपने परिवार में इस कुप्रथा को पूरी तरह त्याग दिया है। हमारा यह प्रयास युवा पीढ़ी को प्रेरित करेगा कि विवाह दो आत्माओं का मिलन है, न कि किसी वस्तु या धन का लेन-देन।” दोनों परिवारों ने संयुक्त रूप से समाज से अपील की है कि  दहेज प्रथा का पूर्ण बहिष्कार करें। बेटी और बेटे को पूर्णत समान अधिकार, सम्मान और अवसर प्रदान करें। विवाह को सादगी, प्रेम और पारदर्शिता के साथ संपन्न करें, ताकि आने वाली पीढ़ियां एक स्वस्थ और समान समाज में पलें-बढ़ें। यह विवाह न केवल माल्या और पारले परिवारों की साझा सोच का प्रतीक है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक मिसाल भी बन गया है। ऐसे कदम ही धीरे-धीरे दहेज जैसी कुरीतियों को जड़ से समाप्त करने में सहायक सिद्ध होंगे।