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राजस्थान: भंडारी मोटर्स द्वारा शीतल प्याऊ का लोकार्पण, वंदे गंगा अभियान के तहत जल सेवा पहल

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राजस्थान  Published by: Shahihurehman , Date: 02/06/2026 01:56:06 pm Share:
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  • 02/06/2026 01:56:06 pm
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संक्षेप

राजस्थान: टोंक से एस. रहमान। पुरुषोत्तम मास की जल पूर्णिमा के पावन अवसर पर भीषण गर्मी को देखते हुए वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के अंतर्गत एक जनहितकारी पहल के रूप में शीतल प्याऊ का लोकार्पण किया गया।

विस्तार

राजस्थान: टोंक से एस. रहमान। पुरुषोत्तम मास की जल पूर्णिमा के पावन अवसर पर भीषण गर्मी को देखते हुए वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के अंतर्गत एक जनहितकारी पहल के रूप में शीतल प्याऊ का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर “भैरव जल मंदिर” का शुभारंभ भी किया गया। कार्यक्रम का आयोजन भण्डारी मोटर्स, टोंक द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य आमजन को गर्मी के मौसम में शुद्ध एवं प्राकृतिक शीतल जल उपलब्ध कराना है। यह आयोजन “नर सेवा नारायण सेवा” के भाव को समर्पित रहा। प्याऊ का निर्माण रिलायंस पेट्रोल पंप के सामने भण्डारी मोटर्स द्वारा कराया गया है। इस अवसर पर समाजसेवी भगवान भण्डारी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह प्याऊ पूरी तरह स्वचालित प्रक्रिया पर आधारित है, जिसमें मटकों के माध्यम से प्राकृतिक रूप से ठंडा जल उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के स्थान पर पारंपरिक मटका प्रणाली को अपनाकर आमजन को स्वास्थ्यवर्धक एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने बताया कि मटकों का पानी न केवल प्राकृतिक रूप से शीतल रहता है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी अधिक लाभकारी है। यह गले की खराश, संक्रमण, जुकाम जैसी समस्याओं से बचाव में सहायक होता है। ऐसे में लोगों को मशीनों द्वारा ठंडे किए गए पानी की बजाय प्राकृतिक तरीके से ठंडे किए गए जल का उपयोग करना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि गर्मी के मौसम में यह प्याऊ राहगीरों, मजदूरों और आमजन के लिए बड़ी राहत साबित होगी। इस अवसर पर वक्ताओं ने जल संरक्षण के महत्व पर भी प्रकाश डाला और वंदे गंगा जन अभियान के तहत अधिक से अधिक लोगों को जल बचाने एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने सेवा भाव को आगे बढ़ाते हुए समाजहित में ऐसे कार्य निरंतर करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में “नर सेवा नारायण सेवा” के संदेश के साथ जल सेवा को जनसेवा का सर्वोत्तम माध्यम बताया गया।


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