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उत्तर प्रदेश: बंद पंचायत भवन और जंग खाए कूड़ाघर, विकास कार्यों पर ग्रामीणों के सवाल
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: प्रयागराज शंकरगढ़ ब्लाक के गांवों को स्वच्छ, विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: प्रयागराज शंकरगढ़ ब्लाक के गांवों को स्वच्छ, विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। योजनाएं बन रही हैं, बजट जारी हो रहा है और फाइलों में विकास की तस्वीर भी चमक रही है। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है। स्वच्छता अभियान के तहत गांवों में लगाए गए कूड़ेदान आज उपेक्षा का शिकार हो गए हैं। कहीं कूड़ेदान अधूरे पड़े हैं, कहीं उन पर ताले लटके हैं तो कहीं झाड़ियां उग आई हैं। नियमित सफाई और रखरखाव की व्यवस्था न होने से ग्रामीण इनका उपयोग नहीं कर पा रहे। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण तो हो गया, लेकिन संचालन की व्यवस्था कभी धरातल पर नहीं उतर सकी। यही स्थिति कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों की है। हर ग्राम पंचायत को दी गई ये गाड़ियां अधिकांश जगहों पर महीनों-सालों से खड़ी हैं या खराब होकर कबाड़ बनने की कगार पर हैं। कहीं चालक नहीं है, कहीं डीजल का इंतजाम नहीं और कहीं मरम्मत के अभाव में काम ठप पड़ा है। लाखों की लागत वाली ये गाड़ियां अब बेकार पड़ी हैं, जबकि गांवों में कूड़ा आज भी खुले में फेंका जा रहा है। पंचायत भवनों की स्थिति भी सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीण विकास और जनसुनवाई के केंद्र माने जाने वाले ये भवन अधिकांश समय बंद रहते हैं। दरवाजों पर लगे ताले और परिसर में छाया सन्नाटा यह बता रहे हैं कि यहां गतिविधियां न के बराबर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जरूरी काम से आने पर घंटों इंतजार करना पड़ता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिलते। कई भवन अब केवल निरीक्षण और फोटो खिंचवाने तक सीमित रह गए हैं। ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लाभ किसे मिला। आज भी कई परिवार कच्चे मकानों और टीन शेड में रहने को मजबूर हैं। बरसात में छत टपकती है और सर्दी-गर्मी में खुले आसमान के नीचे जीवन गुजरता है। उनका कहना है कि यदि योजनाओं से पहले पात्र परिवारों का सही सर्वे होता और प्राथमिकता उन लोगों को दी जाती जिनके पास छत नहीं है, तो स्थिति अलग होती। स्थानीय लोगों का मानना है कि विकास सिर्फ निर्माण और बजट खर्च करने से नहीं होता। जब तक योजनाओं की नियमित निगरानी, संचालन और जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक सरकारी धन का सही उपयोग नहीं हो सकेगा। शंकरगढ़ विकासखंड में बंद पंचायत भवन, सूने कूड़ेदान और खड़ी गाड़ियां ही विकास की अधूरी कहानी कह रही हैं। ग्राम पंचायत डेराबारी के ग्राम बड़गड़ी में बने कूड़ाघर की स्थिति इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, जहां निर्माण के बाद से ही उसमें ताला लगा हुआ है और जंग लग चुकी है।
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