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उत्तर प्रदेश: कृषि निर्यात और बैंकिंग समीक्षा बैठक, किसानों को अनुदान व ऋण सुविधा बढ़ाने के निर्देश

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उत्तर प्रदेश  Published by: Suraj Maurya , Date: 03/04/2026 11:10:53 am Share:
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  • 03/04/2026 11:10:53 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: मिर्जापुर कृषि निर्यात नीति के अंतर्गत जीआई अनुश्रवण एवं क्लस्टर सुविधा इकाई की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार की अध्यक्षता में संपन्न हुई।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: मिर्जापुर कृषि निर्यात नीति के अंतर्गत जीआई अनुश्रवण एवं क्लस्टर सुविधा इकाई की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में कृषि निर्यात को बढ़ावा देने, क्लस्टर विकास और जीआई उत्पादों के प्रसार को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में ज्येष्ठ कृषि विपणन निरीक्षक संजय कुमार ने उत्तर प्रदेश कृषि निर्यात नीति की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि निर्यात आधारित अनुदान के तहत किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को क्लस्टर बनाकर 10 से 30 लाख रुपये तक तथा प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने पर 25 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि किसानों को मानक के अनुरूप उत्पादन के लिए जागरूक किया जाए और अधिक से अधिक निर्यात क्लस्टर विकसित किए जाएं। उन्होंने पोस्ट हार्वेस्ट डिग्री एवं डिप्लोमा के लिए 50 लाख रुपये तक के अनुदान के तहत मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। बैठक में जनपद के जीआई उत्पादों—आदम चीनी चावल, रामनगर भाटा, लंगड़ा आम, बनारस पान पत्ता एवं बनारस ठंडई—के अधिकृत उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ाने और इनके व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए कृषि, उद्यान एवं खाद्य सुरक्षा विभाग को समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए गए।

इसके पश्चात जिलाधिकारी स्तरीय सलाहकार एवं समीक्षा समिति की बैठक में जनपद की बैंकिंग स्थिति की समीक्षा की गई। बताया गया कि जिले में 22 बैंकों की 206 शाखाएं संचालित हैं, जिनमें 137 ग्रामीण, 22 अर्द्धशहरी और 47 शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं। दिसंबर 2025 तक कुल जमा राशि 14,301.07 करोड़ रुपये और कुल ऋण 6,743.55 करोड़ रुपये रहा, जबकि औसत ऋण-जमा अनुपात 47.15 प्रतिशत दर्ज किया गया। जिलाधिकारी ने पाया कि कई प्रमुख बैंक—कैनरा बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, जिला सहकारी बैंक, आर्यावर्त बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक तथा भारतीय स्टेट बैंक—का ऋण-जमा अनुपात राज्य औसत 60 प्रतिशत से कम है। इस पर उन्होंने बैंकों को ऋण वितरण बढ़ाने के निर्देश दिए। बैठक में प्राथमिकता क्षेत्र ऋण, कृषि ऋण, एमएसई एवं कमजोर वर्गों को दिए गए ऋण, एनपीए की स्थिति, किसान क्रेडिट कार्ड, पशुपालन एवं मत्स्य पालन योजनाएं, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम योजनाओं की भी बिंदुवार समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।