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हरियाणा: जल संरक्षण व सामाजिक समानता पर जागरूकता कार्यक्रम, “जल एक है” का दिया संदेश
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संक्षेप
हरियाणा: हांसीजल संरक्षण के प्रति आमजन को जागरूक करने तथा समाज में समानता और समरसता का संदेश देने के उद्देश्य से जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा एक्सईएन कार्यालय परिसर में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
विस्तार
हरियाणा: हांसीजल संरक्षण के प्रति आमजन को जागरूक करने तथा समाज में समानता और समरसता का संदेश देने के उद्देश्य से जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा एक्सईएन कार्यालय परिसर में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय "जल के स्रोत अनेक हो सकते हैं, परंतु जल एक ही होता है" रहा, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों को जल संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक एकता का संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विभागीय अधिकारियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने कहा कि जल प्रकृति का अनमोल उपहार है और पृथ्वी पर जीवन का आधार है। आज बढ़ती जनसंख्या, जल की बढ़ती मांग तथा लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए जल संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। कार्यक्रम में वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों के संरक्षण तथा दैनिक जीवन में पानी के विवेकपूर्ण उपयोग से संबंधित एक विशेष डेमोंस्ट्रेशन भी प्रस्तुत किया गया। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को बताया गया कि छोटी-छोटी सावधानियों और आदतों के माध्यम से बड़ी मात्रा में पानी बचाया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने आह्वान किया कि जल संरक्षण को केवल सरकारी अभियान न समझकर जन आंदोलन बनाया जाए। उन्होंने कहा कि "जल के स्रोत अनेक हो सकते हैं, परंतु जल एक ही होता है" का संदेश केवल पानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में समानता, एकता और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करता है। यदि प्रत्येक नागरिक जल बचाने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का संकल्प ले, तो एक बेहतर और समृद्ध समाज का निर्माण संभव है। इस अवसर पर कार्यकारी अभियंता संदीप त्यागी, म्यूनिसिपल इंजीनियर जयवीर सिंह, अध्यापिका रजनी वर्मा, श्री काली देवी विद्या मंदिर की छात्राएं मैना , तीस्ता,निकिता और अनीता आदि उपस्थित रही।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को समझाया गया कि भले ही पानी कुओं, तालाबों, नदियों, नहरों, वर्षा जल अथवा अन्य स्रोतों से प्राप्त होता हो, लेकिन उसका मूल स्वरूप एक ही होता है। पानी किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करता और हर जीवधारी के लिए समान रूप से आवश्यक है। इसी प्रकार समाज में भी जाति, धर्म, वर्ग, भाषा या क्षेत्र के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। जिस प्रकार सभी स्रोतों का पानी मिलकर एक रूप धारण कर लेता है, उसी प्रकार समाज के सभी वर्गों को मिल-जुलकर सौहार्द और भाईचारे के साथ रहना चाहिए। इस संदेश को और प्रभावी बनाने के लिए एक प्रेरक गतिविधि आयोजित की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि विद्यालय परिसर में लगी विभिन्न टोटियों से आने वाला पानी एक ही टंकी से आता है। किसी भी टोटी से पानी पीने पर प्यास समान रूप से बुझती है। इसके माध्यम से बच्चों को समझाया गया कि बाहरी भिन्नताओं के बावजूद मूल तत्व एक ही होता है। विद्यार्थियों ने इस संदेश को आत्मसात करते हुए सामाजिक समानता और सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया। अधिकारियों ने कहा कि स्वच्छ पेयजल प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है और पानी पर सभी का समान अधिकार है। इसलिए जल संरक्षण के साथ-साथ जल के न्यायसंगत उपयोग और उपलब्धता को सुनिश्चित करना भी हम सभी की जिम्मेदारी है।
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