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मध्य प्रदेश: पोरसा आर्यिका श्री 105 विप्रा श्री माताजी ससंघ ने साधर्मी जनों को धर्म के मार्ग पर चलने के लिए किया प्रेरित
- Photo by : social media
संक्षेप
मध्य प्रदेश: श्री आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर पोरसा में पर्यूषण महापर्व के पावन अवसर पर धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
विस्तार
मध्य प्रदेश: श्री आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर पोरसा में पर्यूषण महापर्व के पावन अवसर पर धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में परम पूज्य आर्यिका श्री 105 विप्रा श्री माताजी ससंघ का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ। इस दौरान पूज्य माताजी ने उपस्थित जैन समाज के श्रद्धालुओं को पर्यूषण महापर्व के धार्मिक महत्व, उसके उद्देश्य तथा पर्व के दौरान पालन किए जाने वाले नियमों के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। आर्यिका श्री 105 विप्रा श्री माताजी ने कहा कि पर्यूषण महापर्व आत्मशुद्धि, संयम, तप, त्याग और क्षमा का महापर्व है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति को अपने जीवन का आत्मावलोकन करने, गलतियों का परिमार्जन करने तथा मन, वचन और कर्म की शुद्धि की प्रेरणा देता है। उन्होंने समाज के सभी साधर्मी बंधुओं से पर्यूषण पर्व के दौरान अधिक से अधिक धार्मिक क्रियाओं में सहभागी बनने और जीवन में संयम एवं सदाचार को अपनाने का आह्वान किया। तेरहद्वीप महामण्डल विधान में मिला सानिध्य पर्यूषण महापर्व के अवसर पर पूज्य आर्यिका श्री 105 विप्रा श्री माताजी ससंघ का तेरहद्वीप महामण्डल विधान में मंगल सानिध्य प्राप्त होने पर पोरसा जैन समाज द्वारा उनका भावपूर्ण स्वागत किया गया। समाज के श्रद्धालुओं ने पूज्य माताजी ससंघ को श्रीफल भेंट कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। पूज्य माताजी ने उपस्थित सभी साधर्मी जनों को दोनों हाथों से मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए धर्म के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनके सानिध्य से जैन समाज के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह एवं धार्मिक वातावरण देखने को मिला। धर्म और आत्मशुद्धि का संदेश पर्यूषण महापर्व के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण रहा। उपस्थित समाजजनों ने पूज्य आर्यिका श्री 105 विप्रा श्री माताजी ससंघ के प्रवचनों को श्रद्धापूर्वक सुना और उनके द्वारा बताए गए धार्मिक नियमों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। पूज्य माताजी ने कहा कि पर्यूषण पर्व का वास्तविक उद्देश्य बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि अपने भीतर परिवर्तन लाना और आत्मा की शुद्धि की ओर आगे बढ़ना है। यदि पर्व के दौरान किए गए तप, त्याग, संयम और क्षमा के भाव को व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में भी उतार ले, तो यही पर्यूषण महापर्व की सच्ची सार्थकता होगी। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूज्य माताजी ससंघ का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर धर्ममय एवं भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।
पूज्य माताजी ने पर्यूषण महापर्व के दौरान जैन धर्म में बताए गए नियमों और सिद्धांतों की जानकारी देते हुए श्रद्धालुओं को अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे मूल सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पर्व के दौरान खान-पान में संयम रखने, अनावश्यक भोग-विलास से दूर रहने, जीवों के प्रति करुणा रखने, क्रोध एवं कटु वचन का त्याग करने तथा अधिक से अधिक समय धर्म आराधना में लगाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं को स्वाध्याय, सामायिक, प्रतिक्रमण, पूजा, ध्यान, तप एवं आत्मचिंतन जैसी धार्मिक क्रियाओं के महत्व से भी अवगत कराया। साथ ही क्षमा भाव को जीवन का अभिन्न अंग बनाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि मन में किसी के प्रति वैर या द्वेष न रखते हुए सभी जीवों के प्रति मैत्री भाव रखना ही सच्ची धर्म साधना है।
महिला मंडल एवं समाजजनों ने भेंट किया श्रीफल। इस अवसर पर श्री आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर कमेटी के अध्यक्ष राजकुमार जैन पांडे, श्री विराग विप्रा वर्षायोग कमेटी के अध्यक्ष प्रमोद जैन पांडे, राकेश जैन शिक्षक, पवन जैन, अभिषेक जैन, अनुपम जैन, अमान जैन सहित समाज के अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। सम्मत महिला मंडल की ओर से भी पूज्य माताजी ससंघ को श्रीफल भेंट कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया गया। कार्यक्रम में जैन समाज के पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे एवं बच्चियां भी शामिल हुए।
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