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राजस्थान: प्रेस वार्ता में सवालों पर घिरे प्रभारी मंत्री, कई मुद्दों पर नहीं दे सके स्पष्ट जवाब
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संक्षेप
राजस्थान: टोंक में जिले के ग्राम अरनिया केदार की कस्टोडियन या भूमि की कथित फर्जी रजिस्ट्री एवं भूमि हड़पने के बहुचर्चित मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पांच आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
विस्तार
राजस्थान: टोंक में जिले के ग्राम अरनिया केदार की कस्टोडियन या भूमि की कथित फर्जी रजिस्ट्री एवं भूमि हड़पने के बहुचर्चित मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पांच आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोतवाली थाना टोक में एक दर्ज एफआईआर संख्या 311 / 2024 दिनांक 4 सितंबर वा 2024 में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, का 468, 471 एवं 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया था। राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ में एस.बी. बन आपराधिक विविध जमानत आवेदन संख्या 7129 /न्या 2026 की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने स्वयं से को निर्दोष बताते हुए भूमि को सद्भावना में खरीदने की दलील दी। उन्होंने यह भी कहा कि भूमि बेचने वाले सह-अभियुक्त नत्थू सिंधी और ओमप्रकाश के विरुद्ध से उन्होंने स्वयं एफआईआर दर्ज करवाई थी तथा दोनों को और पहले ही धारा 483 बीएनएसएस के तहत जमानत मिल चुकी है। मामले के मुख्य परिवादी एवं सामाजिक कार्यकर्ता रामधन चौधरी की शिकायत पर जिला प्रशासन ने उच्च स्तरीय जांच करवाई थी। जांच समिति ने कस्टोडियन भूमि की कुछ रजिस्ट्रियों को प्रथम दृष्टया फर्जी एवं नियम-विरुद्ध पाया। इसके बाद तत्कालीन तहसीलदार टोंक रामधन गुर्जर की ओर से कोतवाली थाना टोंक में एफआईआर दर्ज करवाई गई। प्रकरण में अब तक चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं जांच में कुल 13 लोगों की भूमिका सामने आने के बाद अब शेष आरोपियों के विरुद्ध होने बाली कार्रवाई और गिरफ्तारी पर आमजन की निगाहें टिकी हुई हैं। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर खंडपीठ के न्यायमूर्ति रवि चिरानिया ने सोमवार, 22 जून 2026 को पारित आदेश में राहुल पुत्र मोहनलाल, हनुमान पुत्र रामलाल, कमलेश पुत्र कानाराम, दीपक पुत्र कन्हैयालाल एवं कमलेश पुत्र रमेश की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। जांच में अरनिया केदार सरपंच प्रशासक हंसराज फागना, वार्ड पार्षद राहुल सैनी, हनुमान सैनी, दीपक सैनी, कमलेश चौधरी सहित कुल 13 लोगों की भूमिका सामने आने का उल्लेख किया गया है, हालांकि सभी व्यक्तियों ने अग्रिम जमानत याचिकाएं दायर नहीं की थीं। हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने टीना डाबी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जवाबदेही के लिए तलब किया गया था। जिला कलेक्टर ने न्यायालय को बताया कि गठित समिति ने कुछ रजिस्ट्रियों को अवैध पाया है तथा इस संबंध में अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। न्यायालय ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री, आरोपों की प्रक्ति और सह अभियुक्तों के साथ कथित मिलीभगत के पहलुओं पर विचार करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं और याचिकाकर्ता अग्रिम जमानत के लाभ के पात्र नहीं हैं। अब इस बहुचर्चित कस्टोडियन भूमि घोटाले में शेष आरोपियों के विरुद्ध पुलिस की आगामी कार्रवाई पर जिलेभर की जनता की निगाहें टिकी हुई हैं।
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