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राजस्थान: 52 वर्षों से निभा रहे आस्था की परंपरा, छीतरमल कसाना फिर निकले गोमुख कांवड़ यात्रा पर
- Photo by : social media
संक्षेप
राजस्थान: कोटपूतली हमारी पवित्र परंपराओं और आस्था से ही सनातन धर्म व संस्कृति का संरक्षण संभव है।
विस्तार
राजस्थान: कोटपूतली हमारी पवित्र परंपराओं और आस्था से ही सनातन धर्म व संस्कृति का संरक्षण संभव है। युवा पीढ़ी को भी अपनी इस गौरवशाली संस्कृति से जुड़ना चाहिए। यह विचार युवा गुर्जर महासभा के तहसील अध्यक्ष व समाजसेवी शिवकुमार पटेल ने कांवड़ियों के जत्थे को रवाना करते हुए व्यक्त किए। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी पवित्र श्रावण मास के उपलक्ष्य में उत्तराखंड के गोमुख (गंगोत्री) से गंगाजल लाने के लिए 111 शिव भक्त कांवड़ियों का एक विशाल जत्था सोमवार देर शाम रवाना हुआ। यह जत्था वरिष्ठ श्रद्धालु छीतरमल कसाना व रामरतन पहलवान के नेतृत्व में राजमार्ग की सर्विस लेन स्थित पटेल हीरा मोती सिनेमा से भगवान शंकर के जयकारों और अपार जोश के साथ आगे बढ़ा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिवकुमार पटेल ने जत्थे को केसरिया (भगवा) ध्वज दिखाकर रवाना किया। 52 वीं बार कांवड़ लाने गोमुख पहुंचे छीतरमल कसाना : कांवड़ियों के जत्थे का नेतृत्व कर रहे ग्राम सुन्दरपुरा निवासी श्रद्धालु छीतरमल कसाना आस्था की एक अनूठी मिसाल हैं। वे पिछले 51 वर्षों से निरंतर गोमुख से पैदल कांवड़ लेकर आ रहे हैं। इस वर्ष वे रिकॉर्ड 52 वीं बार पवित्र गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुए हैं, जिसे देखकर युवा कांवड़ियों में भारी उत्साह देखने को मिला। कई राज्यों व गांवों के श्रद्धालु हैं शामिल : भागीरथी गोमुख (गंगा नदी के उद्गम स्थल) से कांवड़ में पवित्र जल भरने के लिए इस दल में राजस्थान व हरियाणा के कई गांवों के श्रद्धालु शामिल हैं। इसमें मुख्य रूप से मोरदा, सुन्दरपुरा, जैनपुरबास, बुटेरी (बानसूर), बबेड़ी, पहाड़ी (बहरोड़), पांचनौता, दरुका नांगल (नांगल चौधरी, हरियाणा), सुखेरा, बनका, बबेरा, खेड़ा और कल्याणपुरा खुर्द के शिवभक्त शामिल हैं। यह जत्था गोमुख से जल भरकर कई दिनों का कठिन सफर पैदल तय करके वापस लौटेगा और आगामी श्रावण मास में बालेष्वर स्थित पौराणिक तीर्थ स्थल पर भगवान शंकर का जलाभिषेक करेगा। कांवड़ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं में छीतरमल कसाना (सुन्दरपुरा), प्रकाश पायला (बड़ाबास), माडूराम, हरिराम, लखमीराम, बाब्बी पंडत, नितीन शर्मा, महेश रावत, मामचन्द, सुआलाल, शीशराम, कृष्ण, मामचन्द, रोशन, मुकेश, पोखरमल, प्रकाश, कृष्ण, धोलाराम, गिर्रिराज, धर्मपाल, रामकुंवार, महेश, गिर्रिराज, सुभाष, महेन्द्र सहित अन्य कई शिवभक्त शामिल हैं। रवानगी के समय मौजूद स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर सभी कांवड़ियों का स्वागत किया और उनकी मंगलमय यात्रा की कामना