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Trending News: नाबालिग की सूझबूझ से रुका मासूम का बाल विवाह, चाइल्डलाइन ने शुरू की कार्रवाई

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राजस्थान  Published by: Yasoda , Date: 21/04/2026 12:06:21 pm Share:
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  • 21/04/2026 12:06:21 pm
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संक्षेप

राजस्थान: कोटा जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग लड़की ने समय रहते मदद की गुहार लगाकर संभावित बाल विवाह को रोकने की कोशिश करी।

विस्तार

राजस्थान: कोटा जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग लड़की ने समय रहते मदद की गुहार लगाकर संभावित बाल विवाह को रोकने की कोशिश करी। जानकारी के अनुसार, लड़की ने चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन की हेल्पलाइन पर कॉल कर बताया कि उसके परिवार वाले उसकी शादी जबरन कराने जा रहे हैं। नाबालिग ने फोन पर रोते हुए बताया कि उसके माता-पिता उसकी शादी झालावाड़ निवासी एक युवक से तय कर रहे हैं, जबकि वह इस शादी के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। उसने यह भी आरोप लगाया कि जब उसने इस शादी का विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की जा रही है और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

फोन पर बातचीत के दौरान लड़की ने भावुक होकर कहा, “अंकल, मेरा बाल विवाह रुकवाओ, घर वाले मेरी शादी करने जा रहे हैं।” यह सुनते ही चाइल्डलाइन की टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। सूचना मिलते ही चाइल्डलाइन की टीम ने स्थानीय प्रशासन और बाल कल्याण समिति को मामले की जानकारी दी गई। इसके बाद संबंधित क्षेत्र में पुलिस और सामाजिक कल्याण विभाग की टीम को भी सक्रिय किया गया। अधिकारियों ने बताया कि नाबालिग के बयान को गंभीरता से लिया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि लड़की की उम्र कानूनी विवाह योग्य आयु से कम है, जिसके चलते यह मामला बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत आता है। प्रशासन ने परिवार से संपर्क कर उन्हें समझाने और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

चाइल्डलाइन अधिकारियों ने बताया कि भारत में बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक समस्या है, जिसके खिलाफ सख्त कानून मौजूद हैं। इसके बावजूद कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आज भी इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना और समय पर मदद उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में बाल विवाह की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लड़की की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि समाज में शिक्षा और जागरूकता के बावजूद बाल विवाह जैसी कुप्रथा पूरी तरह समाप्त क्यों नहीं हो पा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में तुरंत हस्तक्षेप और कठोर कार्रवाई ही प्रभावी समाधान हो सकता है। फिलहाल लड़की को सुरक्षित माहौल में रखने की प्रक्रिया जारी है और प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।