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उत्तर प्रदेश: पुलिस कमिश्नर के आश्वासन के बाद किसान संघर्ष मोर्चा का आंदोलन हुआ स्थगित
- Photo by : social media
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उत्तर प्रदेश: किसानों की गिरफ्तारी के बाद किसान संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने सेक्टर-108 स्थित पुलिस कमिश्नर कार्यालय में वार्ता की। पुलिस कमिश्नर ने किसानों को आश्वासन दिया कि तीनों प्राधिकरणों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (CEO) और जिलाधिकारी (DM) की मौजूदगी में किसानों के लंबित मुद्दों पर गंभीर और विस्तृत वार्ता कराई जाएगी। इसके बाद किसान संघर्ष मोर्चा ने वार्ता पूरी होने तक अपना आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया। किसानों की प्रमुख मांगों में 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट, नए भूमि अधिग्रहण कानून का लाभ, आबादी के लंबित मामलों का समाधान और अन्य किसान मुद्दों का समयबद्ध निस्तारण शामिल है। पुलिस कमिश्नर ने प्राधिकरण स्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने और प्रत्येक मुद्दे के समाधान के लिए समय-सीमा तय कर कार्रवाई सुनिश्चित करने का भी आश्वासन दिया। किसान संघर्ष मोर्चा के प्रमुख नेता डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि पुलिस कमिश्नर के साथ हुई वार्ता सार्थक रही। उन्होंने कहा कि किसानों की मांग थी कि तीनों प्राधिकरणों के CEO और जिलाधिकारी को एक साथ बैठाकर सभी मुद्दों पर गंभीर और निर्णायक बातचीत की जाए। इस मांग पर सहमति बनने के बाद आंदोलन को वार्ता पूरी होने तक स्थगित किया गया है। किसान नेता सुखबीर खलीफा ने कहा कि किसान लंबे समय से अपने मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 17 जुलाई को भी वार्ता का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वार्ता नहीं हो सकी। अब पुलिस कमिश्नर ने ठोस आश्वासन दिया है, जिसके बाद आंदोलन स्थगित करने का फैसला लिया गया। वहीं, किसान नेता सरन प्रधान ने स्पष्ट किया कि आंदोलन स्थगित हुआ है, समाप्त नहीं। वार्ता के परिणाम की समीक्षा के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। यदि किसानों के मुद्दों के समाधान के लिए समयबद्ध और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो किसान संघर्ष मोर्चा दोबारा आंदोलन को मजबूती के साथ आगे बढ़ाएगा। प्रतिनिधिमंडल में बुधपाल यादव, प्रशांत भाटी, उदल आर्य, सचिन एडवोकेट, निशांत भाटी, मानव मुखिया, वीर सिंह नगर, जगबीर नंबरदार, इंदर प्रधान, महेंद्र एडवोकेट, मनीष प्रधान, निशांत रावल, उमेश एडवोकेट, जयप्रकाश सहित अन्य किसान नेता शामिल रहे।