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छत्तीसगढ़: सामूहिक विवाह में 100 जोड़े बंधे परिणय सूत्र में, खुशियों से गूंजा समारोह
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संक्षेप
छत्तीसगढ़: सूरजपुर समाज के आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के हाथ पीले करने की पवित्र भावना के साथ शुरू की गई मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत जिले में आयोजित भव्य सामूहिक विवाह समारोह में 100 जोड़े परिणय सूत्र में बंधकर अपने नवजीवन की मंगलमय यात्रा पर निकल पड़े।
विस्तार
छत्तीसगढ़: सूरजपुर समाज के आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के हाथ पीले करने की पवित्र भावना के साथ शुरू की गई मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत जिले में आयोजित भव्य सामूहिक विवाह समारोह में 100 जोड़े परिणय सूत्र में बंधकर अपने नवजीवन की मंगलमय यात्रा पर निकल पड़े। पूरे विधि-विधान एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुए इस गरिमामय आयोजन में मंत्रोच्चार के बीच फेरे, सिंदूरदान एवं वरमाला की रस्में पूरी कराई गईं। समारोह स्थल पर शहनाइयों की गूंज, बैंड-बाजों की धुन एवं पुष्प वर्षा के बीच नवदंपत्तियों ने एक-दूसरे का जीवन भर साथ निभाने का संकल्प लिया। मंत्री श्रीमती रजवाड़े ने नवदंपत्तियों को दी शुभकामनाएं मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सभी नवविवाहित जोड़ों को सुखमय एवं समृद्ध दांपत्य जीवन की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विवाह जीवन का सबसे पवित्र संस्कार है, जो दो आत्माओं को सात जन्मों के बंधन में बांधता है। उन्होंने बताया कि राज्य शासन द्वारा इस वर्ष दो चरणों में सामूहिक विवाह कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों तक इस कल्याणकारी योजना का लाभ पहुंच सके। आत्मनिर्भर महिला से सशक्त परिवार और समाज मंत्री श्रीमती राजवाड़े मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने अपने उद्बोधन में महिला सशक्तिकरण पर विशेष बल देते हुए कहा कि ‘आत्मनिर्भर महिला, सशक्त परिवार और समृद्ध समाज की आधारशिला है।‘ उन्होंने कहा कि महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर न केवल अपने परिवार को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से मजबूत करती हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण एवं समाज के सर्वांगीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विवाह के पश्चात पारिवारिक दायित्व बढ़ जाते हैं और स्वावलंबी महिलाएं इन जिम्मेदारियों का बेहतर निर्वहन कर परिवार को सशक्त एवं सुदृढ़ बनाती हैं। उन्होंने नवदंपत्तियों से शासन की महिला सशक्तिकरण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। बाल विवाह मुक्त सूरजपुर बनाने की दिलाई शपथ वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री रामसेवक पैकरा ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना को समाज के जरूरतमंद परिवारों के लिए ष्वरदान स्वरूप पहलष् बताते हुए कहा कि यह योजना उन परिवारों के लिए बड़ा सहारा है, जो आर्थिक तंगी के कारण अपनी बेटियों का विवाह सम्मानजनक ढंग से नहीं कर पाते। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति विस्तार से जागरूक किया तथा सूरजपुर जिले को ‘बाल विवाह मुक्त जिला‘ बनाने का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर समारोह में उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं ग्रामीणजनों ने हाथ उठाकर बाल विवाह रोकने तथा समाज में व्यापक जागरूकता फैलाने की सामूहिक शपथ ली। अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा शासन की योजनाओं का लाभ विधायक श्री मरावी विधायक श्री भूलन सिंह मरावी ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान राज्य शासन ‘अंत्योदय‘ की भावना के साथ कार्य कर रहा है तथा शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का अथक प्रयास निरंतर जारी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी राहत है, जिससे बेटियों के सम्मान, सुरक्षा एवं स्वाभिमान को बढ़ावा मिलता है। यह योजना समाज में दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों के विरुद्ध भी एक सशक्त संदेश देती है। नवदंपत्तियों के चेहरे पर खुशी, परिजनों की आंखें भर आईं सामूहिक विवाह समारोह में बंधन में बंधे नवदंपत्तियों के चेहरों पर खुशी एवं संतोष की चमक स्पष्ट दिखाई दी। शासन द्वारा आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में अपनी बेटियों को विदा करते समय कई परिजनों की आंखें भर आईं। नवदंपत्तियों एवं उनके परिजनों ने शासन-प्रशासन के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके सपनों को साकार किया है। ये जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती चंद्रमणि पैकरा, उपाध्यक्ष श्रीमती रेखालाल राजवाड़े, जनपद अध्यक्ष श्रीमती स्वाति सिंह, श्री मुरली मनोहर सोनी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, जिला स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नवदंपत्तियों के परिजन तथा क्षेत्रीय जनसमुदाय उपस्थित रहा। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय जिला प्रशासन तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने सुनिश्चित किया।
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