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उत्तर प्रदेश: आदिवासी अस्मिता और किसानों की जमीन बचाना हमारा मूल कर्तव्य: संदीप मिश्र

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उत्तर प्रदेश  Published by: Indresh Kumar Pandey , Date: 05/11/2026 05:01:51 pm Share:
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  • 05/11/2026 05:01:51 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा आदिवासी परिवारों की अस्मिता एवं किसानों की उपजाऊ जमीन बचाने के मुद्दे को लेकर तरिया में पंचायत आयोजित की गई। आदिवासी परिवारों और किसानों के आह्वान पर

विस्तार

उत्तर प्रदेश: जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा आदिवासी परिवारों की अस्मिता एवं किसानों की उपजाऊ जमीन बचाने के मुद्दे को लेकर तरिया में पंचायत आयोजित की गई। आदिवासी परिवारों और किसानों के आह्वान पर आयोजित इस पंचायत में किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्र अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुंचे। उन्होंने जमीन पर बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और उनके संघर्ष में साथ देने का भरोसा दिलाया। पंचायत को संबोधित करते हुए मोर्चा संयोजक संदीप मिश्र ने कहा कि आदिवासी अस्मिता और किसानों की जमीन बचाना हमारा मूल कर्तव्य है। जनपद में औद्योगिक विकास के नाम पर हजारों हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने की योजनाएं बनाई जा रही हैं, जिससे किसानों और आदिवासी परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है। 

उन्होंने आरोप लगाया कि विकास की योजनाओं में स्थानीय जनता के हितों और पर्यावरण संरक्षण को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोनभद्र की जनता ऐसी योजनाओं को स्वीकार नहीं करेगी, जिनसे क्षेत्र प्रदूषण की चपेट में आए और स्थानीय लोगों की जमीन प्रभावित हो। उन्होंने जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वास्तव में क्षेत्र का विकास करना है तो स्थानीय जरूरतों के अनुरूप सड़कों का निर्माण कराया जाए। उन्होंने कलवारी से खलियारी तक फोरलेन, मुर्धवा से छत्तीसगढ़ बॉर्डर तक, हाथीनाला से मध्यप्रदेश बॉर्डर तक तथा हाथीनाला से विंढमगंज झारखंड बॉर्डर तक फोरलेन सड़क बनाने की मांग की। इसके अलावा पटवध से पिंडारी और पोखरिया तक सड़क निर्माण कराने की भी मांग उठाई।

वहीं, 'पेड़ हैं तो प्राण हैं' आंदोलन के संयोजक रामसूरत खरवार ने कहा कि जल, जंगल और जमीन हमारी धरोहर हैं। इन्हें किसी भी कीमत पर बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। आदिवासी समाज और पर्यावरण की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होकर आगे आना होगा।कार्यक्रम में लक्ष्मण वादी ने कहा कि यह लड़ाई आदिवासी अस्मिता और कॉरपोरेट हितों के बीच की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों और जमीन की रक्षा के लिए ग्रामीण हर स्तर पर संघर्ष करेंगे। पंचायत में गुलाब चेरो, बिंदू खरवार, दिनेश पनिका, सुरेश गोड़, विकास गोड़, बिंदू अगरिया सहित सैकड़ों की संख्या में आदिवासी परिवारों और किसानों की मौजूदगी रही। पंचायत में जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों पर एकजुटता जताई गई।