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उत्तर प्रदेश: भक्ति का दिखा उल्लास, शांतिनाथ महामंडल विधान का चौथा दिन हुआ संपन्न
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: रामपुर मनिहारान जैन समाज प्रबंधकारिणी समिति, रामपुर मनिहारान के तत्वावधान में पूज्य आचार्य श्री 108 भारत भूषण जी महाराज के मंगल सानिध्य में अष्टाह्निका महापर्व के अवसर पर आयोजित 9 दिवसीय श्री 1008 शांतिनाथ महामण्डल विधान के चौथे दिन धार्मिक कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ संपन्न हुए।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: रामपुर मनिहारान जैन समाज प्रबंधकारिणी समिति, रामपुर मनिहारान के तत्वावधान में पूज्य आचार्य श्री 108 भारत भूषण जी महाराज के मंगल सानिध्य में अष्टाह्निका महापर्व के अवसर पर आयोजित 9 दिवसीय श्री 1008 शांतिनाथ महामण्डल विधान के चौथे दिन धार्मिक कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ संपन्न हुए। प्रातःकाल श्री बड़े जैन मंदिर जी में भगवान श्री 1008 शांतिनाथ का विधि-विधानपूर्वक अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। आज की शांतिधारा का सौभाग्य श्याम लाल जैन एवं कमलेश जैन को प्राप्त हुआ, जिन्हें सौधर्म इन्द्र बनने का भी पुण्य अवसर मिला। इसके उपरांत नित्य-नियम पूजा सम्पन्न हुई तथा महामण्डल विधान की विभिन्न धार्मिक क्रियाएँ प्रारंभ हुईं। विधान के दौरान अत्यंत आकर्षक एवं भव्य समवशरण की रचना की गई। समवशरण की गंधकुटी में चारों दिशाओं में भगवान जिनेन्द्र की प्रतिमाएँ विराजमान की गईं, जिनके दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। विधान में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित किया। इन्द्र-इन्द्राणी बने महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने भक्ति संगीत पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान करते हुए आचार्य श्री 108 भारत भूषण जी महाराज ने कहा कि "सभी पर्वों में अष्टाह्निका महापर्व का विशेष महत्व है। यह वर्ष में तीन बार आता है और हमें इसे पूर्ण श्रद्धा, भक्ति तथा आत्मचिंतन के साथ मनाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि "प्रभु भक्ति से जो सुख और आत्मिक आनंद प्राप्त होता है, वह संसार के किसी भी भौतिक सुख से नहीं मिल सकता। सच्चे मन से की गई प्रभु भक्ति कभी निष्फल नहीं जाती और वही जीव को संसार रूपी जन्म-मरण के चक्र से मुक्त करती है।