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उत्तर प्रदेश: सत्संग से शुरू होता है भगवत प्राप्ति और भगवान की शरण का मार्ग : स्वामी स्वरूपानंद
- Photo by : social media
विस्तार
उत्तर प्रदेश: कस्बे के मंदिर ठाकुरद्वारा में धार्मिक भक्ति समाज के तत्वावधान में पिछले चार दिनों से चल रहे सत्संग में स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं को सत्संग की महिमा का वर्णन करते हुए प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि भगवत प्राप्ति और भगवान की शरण का मार्ग सत्संग से ही शुरू होता है। सत्संग सुनने और उस पर मनन करने वाला व्यक्ति संसार से कम और भगवान से अधिक जुड़ता है। स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज ने कहा कि भगवान की कृपा के बिना सत्संग की प्राप्ति संभव नहीं है। इसलिए मनुष्य को सत्संग सुनने के साथ-साथ उसके बताए मार्ग पर अमल भी करना चाहिए, तभी उसका वास्तविक लाभ प्राप्त हो सकता है। योगीराज ब्रह्मनिष्ठ, वीतराग परमहंस स्वामी दयानंद गिरि जी महाराज के परम शिष्य स्वामी स्वरूपानंद जी ने कहा कि सत्संग से विवेक और विवेक से सत्य-असत्य का बोध होता है। इससे मनुष्य अपना लोक और परलोक सुधार सकता है तथा उसे आत्मज्ञान की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि आत्मज्ञान प्राप्त होने के बाद मनुष्य को कण-कण में प्रभु के दर्शन होने लगते हैं। सत्संग के दौरान ललित संगल, आनंद चंचल सहित कई श्रद्धालुओं ने गुरुदेव की शान में भजनों की प्रस्तुति दी। श्रद्धालुओं को नियमित रूप से प्राणायाम का अभ्यास भी कराया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे। गुरु पूर्णिमा पर आज होगा हवन और भंडारा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को झिंझाना के आर्य समाज मंदिर में हवन का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद गुरुदेव स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज के आशीर्वचन होंगे। कस्बे और दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालु वीतराग परमहंस स्वामी दयानंद गिरि जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। कार्यक्रम के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
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