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उत्तर प्रदेश: अंबेडकर जयंती पर देशभर में श्रद्धांजलि, समानता और न्याय का दिया संदेश

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उत्तर प्रदेश  Published by: Suraj Maurya , Date: 14/04/2026 12:52:07 pm Share:
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  • 14/04/2026 12:52:07 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: भारत रत्न, संविधान निर्माता एवं महान समाज सुधारक डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती (14 अप्रैल 1891) के पावन अवसर पर पूरे देश में श्रद्धा, सम्मान और उत्साह का वातावरण है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: भारत रत्न, संविधान निर्माता एवं महान समाज सुधारक डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती (14 अप्रैल 1891) के पावन अवसर पर पूरे देश में श्रद्धा, सम्मान और उत्साह का वातावरण है। इस अवसर पर लोगों ने बाबा साहेब को कोटि-कोटि नमन करते हुए उनके विचारों को याद किया और उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। बाबा साहेब ने शोषित, वंचित, पिछड़े, अनुसूचित एवं जनजातीय समाज को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने दलितों, महिलाओं और श्रमिकों के अधिकारों के लिए ऐतिहासिक कार्य किए और समाज में समानता, न्याय एवं शिक्षा की अलख जगाई। अंबेडकर जयंती केवल एक पर्व नहीं, बल्कि समानता, सामाजिक न्याय और शिक्षा के प्रति उनके समर्पण को सम्मानित करने का दिन है। इस दिन देशभर में संसद परिसर, स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों पर श्रद्धांजलि सभाएं, गोष्ठियां, रैलियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

 

लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपने गली-मोहल्ले और क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रमों—जैसे गोष्ठी, शोभायात्रा या विचार संगोष्ठी—में शामिल होकर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि दें और उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें। बाबा साहेब के अमर विचार आज भी हमें मार्गदर्शन देते हैं। "शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो।" "दिल में बाबासाहेब, आंखों में संविधान, यही है एक सच्चे भारतीय की पहचान।" "सोए हुए भारत को जगाया, हमें इंसानियत का धर्म सिखाया।" उन्होंने शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बताते हुए कहा था- "शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पिएगा वही दहाड़ेगा।" आज के दिन हम सभी संकल्प लें कि उनके बताए मार्ग पर चलकर एक समतामूलक, न्यायपूर्ण और सशक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।