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छत्तीसगढ़: सूरजपुर के स्कूलों में मनाया गया ई-कचरा प्रबंधन दिवस, विद्यार्थियों को किया जागरूक
- Photo by : social media
संक्षेप
छत्तीसगढ़: सूरजपुर पर्यावरण संरक्षण और ई-कचरे के सुरक्षित प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से सूरजपुर जिले के विद्यालयों में ई-कचरा प्रबंधन दिवस मनाया गया।
विस्तार
छत्तीसगढ़: सूरजपुर पर्यावरण संरक्षण और ई-कचरे के सुरक्षित प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से सूरजपुर जिले के विद्यालयों में ई-कचरा प्रबंधन दिवस मनाया गया। ईको क्लब फॉर मिशन लाइफ के तहत आयोजित इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे से होने वाले नुकसान और उसके उचित निपटान के तरीकों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का आयोजन कलेक्टर श्रीमती रेना जमील के निर्देशन, जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा के मार्गदर्शन और डीएमसी मनोज साहू के नेतृत्व में किया गया। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पतरापाली सहित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों को पुराने मोबाइल फोन, बैटरी, चार्जर, कंप्यूटर और अन्य अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सुरक्षित प्रबंधन के बारे में बताया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को 3R सिद्धांत यानी *रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकल* (कम उपयोग, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण) का महत्व समझाया गया। उन्हें बताया गया कि ई-कचरे को खुले में फेंकने या जलाने से मिट्टी, पानी और हवा प्रदूषित हो सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद हानिकारक पदार्थ पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। इसलिए ई-कचरे को सामान्य कचरे से अलग एकत्रित कर अधिकृत रिसाइक्लर को देना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए नारा लेखन और प्रश्नोत्तरी जैसी गतिविधियां भी आयोजित की गईं। इसके माध्यम से बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई करने, जिज्ञासु बने रहने और किसी विषय को समझने में कठिनाई होने पर शिक्षकों से बेझिझक सवाल पूछने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। साथ ही, उन्हें अपने परिवार और समुदाय के लोगों तक ई-कचरे के सुरक्षित निपटान का संदेश पहुंचाने की अपील की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी विकसित करना और ई-कचरे के उचित प्रबंधन को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करना रहा।