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गुजरात: मकान टूटने के 4 महीने बाद भी नहीं हुआ पुनर्वास, प्रभावित परिवारों में बढ़ा आक्रोश

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गुजरात  Published by: Maheshwari Kanjibhai Naranbhai , Date: 23/07/2026 05:37:50 pm Share:
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  • Published by: Maheshwari Kanjibhai Naranbhai ,
  • Date:
  • 23/07/2026 05:37:50 pm
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संक्षेप

गुजरात: गांधीधाम गुजरात के गांधीधाम में महानगरपालिका की कार्रवाई के बाद बेघर हुए गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का पुनर्वास अब तक नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

विस्तार

गुजरात: गांधीधाम गुजरात के गांधीधाम में महानगरपालिका की कार्रवाई के बाद बेघर हुए गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का पुनर्वास अब तक नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि मकान तोड़े जाने के करीब तीन से चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक उनके पुनर्वास या वैकल्पिक आवास की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की है। प्रभावित लोगों का कहना है कि कार्रवाई के बाद से वे लगातार अस्थायी स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि बार-बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। इससे कई परिवारों के सामने रहने, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने का संकट खड़ा हो गया है।

अपनी मांगों को लेकर प्रभावित परिवारों ने लगातार 18 दिनों तक धरना-प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया। उनका कहना है कि यदि जल्द पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रभावित लोगों की प्रमुख मांग है कि जिन परिवारों के मकान हटाए गए हैं, उन्हें जल्द से जल्द वैकल्पिक आवास या पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही उनका कहना है कि प्रशासन को संवैधानिक और मानवीय आधार पर प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए।

वहीं, इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के साथ-साथ प्रभावित नागरिकों के अधिकारों और पुनर्वास का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में प्रभावित परिवार प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा।